
यूनुस मेमन

बिलासपुर। रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से निजी नर्सिंग होम भेजी गई एक महिला की ऑपरेशन के बाद मौत हो जाने का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने इलाज में लापरवाही और सरकारी अस्पताल की डॉक्टर पर मरीज को निजी अस्पताल रेफर करने का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार रतनपुर निवासी 50 वर्षीय कुमारी बाई को 3 जून को पेट दर्द की शिकायत पर सीएचसी रतनपुर में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. नेहल झा ने सरकारी व्यवस्था में उपचार करने के बजाय उन्हें एक निजी नर्सिंग होम भेज दिया। इसके बाद बिलासपुर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई गई, जहां की रिपोर्ट के आधार पर बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन आवश्यक बताया गया।

परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन के लिए 38 हजार रुपये खर्च बताए गए थे, जिसमें से 15 हजार रुपये अग्रिम जमा कराए गए। 6 जून को निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन किया गया, लेकिन इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन ने रक्तचाप (बीपी) गिरने की बात कहते हुए मरीज को सिम्स रेफर कर दिया। वहीं परिजनों का आरोप है कि महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी और बाद में उसे रेफर किया गया।
रविवार को सिम्स में छह डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान आक्रोशित परिजनों ने हंगामा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को जांच कराने के निर्देश दिए हैं। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि रविवार होने के कारण जांच टीम का गठन नहीं हो सका। सोमवार को टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
