
बिलासपुर। निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान हुई दो मौतों के मामलों में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। एक ओर नोबेल अस्पताल में मरीज की मौत की जांच के लिए दो डॉक्टरों की टीम गठित की गई है, वहीं रतनपुर स्थित मातृका नर्सिंग होम में महिला की मौत के लगभग एक माह बाद ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को सील कर दिया गया है।
नोबेल अस्पताल के रिकॉर्ड जब्त, सात दिन में जांच रिपोर्ट
ग्राम भिलौनी (काठाकोनी) निवासी अजय ताम्रकार सड़क हादसे में घायल होने के बाद 16 जुलाई को रिंग रोड-2 स्थित नोबेल अस्पताल में भर्ती हुए थे। जांच में उनके कंधे की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया था। परिजनों के अनुसार 18 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजे उन्हें ऑपरेशन के लिए ले जाया गया, लेकिन शाम करीब 7 बजे उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई।
मृतक की पत्नी सुमन ताम्रकार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने मामले की जांच के लिए डॉ. सौरभ शर्मा और डॉ. रक्षित जोगी की दो सदस्यीय टीम गठित की है। जांच दल ने बुधवार को अस्पताल पहुंचकर मरीज के उपचार से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए। स्वास्थ्य विभाग ने सात दिनों के भीतर जांच पूरी करने की बात कही है।
रतनपुर में मातृका नर्सिंग होम का ओटी सील
दूसरे मामले में रतनपुर के निजी मातृका नर्सिंग होम में उपचार के दौरान महिला की मौत के करीब एक महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है।
मोहदा निवासी कुमारी बाई साहू को 3 जून को उपचार के लिए रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। परिजनों के अनुसार वहां मौजूद सर्जन डॉ. मेहुल झा ने बच्चेदानी के ऑपरेशन की सलाह दी और 6 जून को निजी अस्पताल मातृका में ऑपरेशन के लिए बुलाया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एंबुलेंस से सिम्स रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
मृतका के पुत्र महेश साहू ने मामले में कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल ने बताया कि मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेज पुलिस ने मांगे हैं, जिन्हें जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।
दोनों मामलों में जांच जारी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर चिकित्सा लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
