
बिलासपुर। शहर में बिजली विभाग का स्मार्ट मीटर अभियान अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतों ने इस योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिजली विभाग का दावा है कि शहर के करीब 1.05 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब 40 हजार उपभोक्ता अब अपने घरों और दुकानों में स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध कर रहे हैं।
स्मार्ट मीटर लगवा चुके कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर बदलने के बाद उनका बिजली बिल पहले की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़कर आने लगा है। उनका कहना है कि अचानक बढ़े हुए बिलों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। यही वजह है कि जिन क्षेत्रों में अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां लोग इसे लगवाने से साफ इनकार कर रहे हैं। कई स्थानों पर मीटर लगाने पहुंचे कर्मचारियों को लोगों के विरोध और नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगवाना स्वैच्छिक प्रक्रिया होना चाहिए, लेकिन विभाग के कर्मचारी मीटर लगाने के लिए अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। वहीं, शिकायत लेकर बिजली कार्यालय पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि हर बार उन्हें यही जवाब दिया जाता है कि जांच में मीटर और बिल दोनों सही पाए गए हैं।
स्मार्ट मीटर की सटीकता जांचने के लिए बिजली कंपनी ने तिफरा में करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक लैब स्थापित की है। विभाग के अनुसार पिछले तीन महीनों में 47 उपभोक्ताओं ने अपने मीटर जांच के लिए दिए और सभी मीटर जांच में सही पाए गए। अधीक्षण यंत्री पी. श्रीनिवास राजू का कहना है कि जांच में किसी भी मीटर में तकनीकी गड़बड़ी नहीं मिली।
हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि मीटर पूरी तरह सही हैं, तो फिर पुराने मीटर की तुलना में बिल इतने अधिक क्यों आ रहे हैं। लोगों का तर्क है कि यदि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत पहले की अपेक्षा अधिक दर्ज हो रही है और इसका असर सीधे बिल पर पड़ रहा है, तो विभाग को इसकी स्पष्ट और तकनीकी व्याख्या करनी चाहिए।
उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि यदि नए मीटर से लगातार अधिक बिल ही आना है और लोगों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो फिर पुराने मीटर बदलने की आवश्यकता क्या थी। उनका मानना है कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि मीटर सही हैं, बल्कि विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है। इसी सवाल ने अब स्मार्ट मीटर अभियान को लेकर लोगों के बीच अविश्वास और असंतोष बढ़ा दिया है।
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि अधिक बिल आने के कारणों का निष्कर्ष केवल शिकायतों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। वास्तविक स्थिति का पता विस्तृत तकनीकी जांच, खपत के तुलनात्मक विश्लेषण और प्रत्येक उपभोक्ता के उपयोग के पैटर्न की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल विभाग जांच में मीटरों को सही बता रहा है, जबकि बड़ी संख्या में उपभोक्ता बढ़े हुए बिलों को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
