
अजमेर। राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को सनसनीखेज वारदात सामने आई। चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसी की बैरक में बंद साथी कैदी विष्णु जाट ने कथित तौर पर गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या की इस घटना ने प्रदेश की हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जगन गुर्जर और विष्णु जाट ने सोमवार सुबह बैरक की सफाई की और साथ में लूडो भी खेला। सुबह करीब 10 बजे नाश्ते के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद दोपहर 11 बजे से 3 बजे के बीच सेल बंद रहने के दौरान आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया। जब जेल स्टाफ नियमित राउंड पर पहुंचा तो जगन गुर्जर मृत अवस्था में मिला, जबकि विष्णु बैरक में ही मौजूद था। पूछताछ में उसने हत्या करना स्वीकार करते हुए कहा, “मैंने मार डाला।”
पुलिस के अनुसार, हत्या के समय बैरक में 15 से 18 अन्य कैदी भी मौजूद थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़, एफएसएल टीम और न्यायिक मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया। जेल प्रशासन की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
कुलदीप जघीना हत्याकांड का मुख्य आरोपी है विष्णु
जगन गुर्जर की हत्या का आरोपी विष्णु जाट भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। पुलिस के अनुसार, उसने कुलदीप जघीना की हत्या की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी और जयपुर से भरतपुर तक उसकी गतिविधियों की जानकारी शूटरों तक पहुंचाई थी। हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र और शस्त्र अधिनियम सहित कई मामलों में आरोपी विष्णु पिछले तीन वर्षों से जेल में बंद था।
32 साल का अपराध, 100 से अधिक मुकदमे
चंबल के बीहड़ों से अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला जगन गुर्जर करीब 32 वर्षों तक आतंक का पर्याय बना रहा। उसके खिलाफ राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में हत्या, अपहरण, फिरौती, लूट सहित 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 1994 में अपराध की दुनिया में प्रवेश करने वाले जगन ने कई चर्चित वारदातों को अंजाम दिया।
वर्ष 2019 में धौलपुर में दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। उस प्रकरण में एक पुलिसकर्मी की हत्या का आरोप भी उस पर लगा था। वहीं 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर भी सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय उस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
जगन ने अलग-अलग समय पर कई बार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण भी किया। वर्ष 2001 में धौलपुर पुलिस अधीक्षक के सामने, 2009 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में, 2018 में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने तथा वर्ष 2022 में करौली पुलिस के समक्ष उसने आत्मसमर्पण किया था।
हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रदेश की एकमात्र हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर हुई इस हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। घटना के बाद सीसीटीवी निगरानी, हाई-रिस्क कैदियों की मॉनिटरिंग, बैरकों की सुरक्षा, जेल कर्मचारियों की सतर्कता और इंटेलिजेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद यह हत्या कैसे हुई और सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदार कौन है।
