

कहा जाता है कि किस्मत उन्हीं का साथ देती है जो प्रयास करना नहीं छोड़ते। कई बार सफलता प्रतिभा से पहले साहस और निरंतर कोशिश का इनाम होती है। मध्य प्रदेश में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती से जुड़ा एक ऐसा ही प्रेरक प्रसंग सामने आया, जिसने यह साबित कर दिया कि हार मान लेना सबसे बड़ी हार होती है।
फॉरेस्ट गार्ड के 26 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। लिखित परीक्षा के बाद 50 अभ्यर्थियों का चयन शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए हुआ। इस परीक्षा में 15 किलोमीटर की दौड़ के साथ लंबी कूद और ऊंची कूद जैसे टेस्ट शामिल थे।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और कठिन फिजिकल टेस्ट की आशंका से अधिकांश अभ्यर्थियों ने पहले ही हार मान ली। नतीजा यह रहा कि निर्धारित दिन शारीरिक परीक्षा देने कोई भी उम्मीदवार नहीं पहुंचा। सिर्फ एक युवती ने हिम्मत दिखाई और परीक्षा स्थल पर पहुंची।

युवती ने धैर्य और आत्मविश्वास के साथ निर्धारित 15 किलोमीटर की दूरी आराम से पैदल ही पूरी की। प्रतियोगिता में उसके सामने कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं था। कोई प्रतिस्पर्धा ना होने से उसने शारीरिक परीक्षा पूरी की और अंततः फॉरेस्ट गार्ड के पद पर चयनित हो गई।
यह घटना केवल एक नौकरी मिलने की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का उदाहरण है कि सफलता अक्सर उसी को मिलती है जो आखिरी क्षण तक मैदान नहीं छोड़ता। जहां बाकी उम्मीदवारों ने कठिनाई देखकर कोशिश ही नहीं की, वहीं एक युवती ने प्रयास किया और मंजिल हासिल कर ली।
यह प्रेरक प्रसंग बताता है कि मेहनत और हिम्मत के बिना किस्मत भी साथ नहीं देती। कोशिश करने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटता, लेकिन प्रयास छोड़ देने वाला अवसर आने से पहले ही हार जाता है।
