

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों, पारिवारिक मूल्यों और मातृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह वर्षीय बच्ची वेनेला की संदिग्ध मौत के मामले में उसकी मां प्रियंका और उसके लिव-इन पार्टनर मोहन जी महालिंगप्पा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील और चर्चित बना दिया है।
खुशहाल परिवार में हुई थी शुरुआत
40 वर्षीय प्रियंका पेशे से अधिवक्ता हैं। वर्ष 2007 में उनकी शादी दावणगेरे निवासी प्रवीण बासप्पा से हुई थी। प्रवीण पेशे से शिक्षक हैं तथा एक निजी शिक्षण संस्थान क्लाउड 9 इंटरनेशनल स्कूल का संचालन भी करते हैं।
शादी के बाद दोनों का जीवन सामान्य और खुशहाल बताया जाता है। प्रियंका की वकालत अच्छी चल रही थी, वहीं प्रवीण का शैक्षणिक संस्थान भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहा था। समय के साथ दंपति की दो बेटियां हुईं। परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न माना जाता था।
जमीन विवाद के केस ने बदल दी जिंदगी
बताया जाता है कि पिछले वर्ष प्रियंका एक 25 एकड़ पुश्तैनी जमीन विवाद से जुड़े सिविल मामले के सिलसिले में बेंगलुरु आने-जाने लगीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात अपने कॉलेज के पुराने मित्र और पूर्व प्रेमी मोहन जी महालिंगप्पा से हुई।
मोहन वर्तमान में रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के बीच दोबारा नजदीकियां बढ़ीं और समय के साथ उनका संबंध गहरा होता गया।
आरोप है कि दोनों ने बाद में काशी जाकर विवाह जैसा धार्मिक अनुष्ठान भी किया और नए साल के दौरान दुबई की यात्रा पर भी गए।
पति-पत्नी के बीच बढ़ी दूरी
परिजनों के अनुसार, प्रियंका के व्यवहार और जीवनशैली में आए बदलाव को उनके पति प्रवीण काफी समय से महसूस कर रहे थे। जनवरी 2026 के बाद दोनों के संबंध और खराब हुए तथा अंततः अलगाव की स्थिति बन गई।
अलगाव के बाद बड़ी बेटी पिता प्रवीण के साथ रहने लगी जबकि छोटी बेटी वेनेला अपनी मां प्रियंका के साथ रहने लगी। प्रियंका बाद में मोहन के साथ रहने लगी थीं।
जन्मदिन के दिन हुई संदिग्ध घटना
पुलिस जांच के अनुसार, 24 मार्च को वेनेला का जन्मदिन था। इस अवसर पर प्रियंका, मोहन और वेनेला बेंगलुरु के इंदिरानगर क्षेत्र गए थे। एक समय प्रियंका खरीदारी के लिए कार से बाहर चली गईं। इसी दौरान वेनेला ने मोहन से आइसक्रीम मांगी। बताया जाता है कि बच्ची को लाया गया फ्लेवर पसंद नहीं आया और उसने दूसरे फ्लेवर की मांग की।
इसी बात पर मोहन को गुस्सा आ गया और उसने बच्ची के साथ मारपीट की। उसके पेट पर घूंसे बरसाए। बच्ची के रोने पर उसका मुंह और नाक दबाने का आरोप है, जिससे उसकी मौत हो गई।
जब प्रियंका लौटी और अपनी बेटी को अचेत अवस्था में देखा तो एक मां होने के नाते उसका रिएक्शन सामने आने की बजाय वह प्रेमी को बचाने में जुट गई । दोनों ने मिलकर सबूत मिटाया और बच्ची को लेकर घर चले गए। अगले दिन सुबह दोनों मिलकर नाटक करने लगे कि बच्ची को न जाने क्या हो गया है और उसे अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत को प्राकृतिक बताने का प्रयास?
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद बच्ची की मौत को प्राकृतिक दिखाने का प्रयास किया गया। अगले दिन उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
बच्ची के पिता प्रवीण बासप्पा को जब घटना की जानकारी मिली तो वे तुरंत बेंगलुरु पहुंचे। उन्हें मौत की परिस्थितियों पर संदेह हुआ और उन्होंने पोस्टमार्टम कराने पर जोर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बढ़ा शक
4 अप्रैल को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दिया। प्रवीण ने रिपोर्ट अपनी बड़ी बहन को भेजी, जो विदेश में चिकित्सक हैं। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद उन्होंने मौत को संदिग्ध बताया।
इसके बाद प्रवीण ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एफआईआर के बाद फरार हुई प्रियंका
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मोहन ने पहले से अग्रिम जमानत ले रखी थी, जिससे पुलिस का संदेह और बढ़ा।
बाद में अदालत में पुलिस द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अग्रिम जमानत निरस्त कर दी गई। इसके बाद मोहन को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में लिया गया।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान मोहन ने घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके बाद प्रियंका की तलाश शुरू हुई।
जांच में पता चला कि प्रियंका मोबाइल फोन और बैंकिंग गतिविधियां बंद कर छिपी हुई थीं। बाद में उन्हें भी मोहन से जुड़े एक परिसर से गिरफ्तार कर लिया गया।
समाज में चर्चा का विषय बना मामला
यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार, रिश्तों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
एक समय सुखी और संपन्न माना जाने वाला परिवार कुछ ही वर्षों में टूट गया। दो बेटियों वाले इस परिवार में वैवाहिक संबंधों के टूटने, नए रिश्ते बनने और अंततः एक मासूम बच्ची की मौत ने पूरे घटनाक्रम को बेहद दर्दनाक बना दिया।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अदालत में सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर ही अंतिम रूप से तय होगा कि आरोप कितने प्रमाणित होते हैं और आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी क्या बनती है।
