
यूनुस मेमन

धार्मिक नगरी रतनपुर, जिसे कभी तालाबों का शहर कहा जाता था, आज गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। बताया जाता है कि एक समय यहां करीब 900 तालाब हुआ करते थे, जो अब सिमटकर मात्र 159 रह गए हैं। विडंबना यह है कि तालाबों की पहचान रखने वाले इस नगर के लोग आज पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
नगर पालिका परिषद रतनपुर के 15 वार्डों में पिछले तीन दिनों से नियमित जलापूर्ति बाधित है। वर्तमान में नगर पालिका केवल दो टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति कर रही है, जिससे कुछ ही वार्डों तक पानी पहुंच पा रहा है। अधिकांश वार्डों में लोग पानी के लिए परेशान हैं और वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेने को मजबूर हैं।
पेयजल संकट का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। नगरवासियों का कहना है कि समय पर पानी नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, नौकरीपेशा लोगों को कार्यालय पहुंचने में देरी हो रही है और दिहाड़ी मजदूर समय पर काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
पानी की समस्या को लेकर वार्ड पार्षद भी नाराज हैं। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि उन्हें अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर तक पहुंचना पड़ रहा है।
इस बीच नगर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी नगर पालिका अध्यक्ष लव कुश कश्यप की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और कुछ जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अध्यक्ष बनने के बाद से पेयजल, साफ-सफाई, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है। लोगों का कहना है कि नगर के कई हिस्सों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही, साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित है और नागरिक सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार किया जाता तो आज नगरवासियों को इस तरह पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
हालांकि, इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुखसागर खुटे ने बताया कि मुख्य पाइपलाइन में तकनीकी खराबी आने के कारण जलापूर्ति प्रभावित हुई है। पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है और बहुत जल्द नियमित जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
पेयजल संकट से परेशान नगरवासियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने और नगर की मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
