
बिलासपुर। जिला न्यायालय में आर्म्स एक्ट के एक आरोपी को जमानत दिलाने के लिए फर्जी ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को दस्तावेज पर संदेह होने पर राजस्व विभाग से सत्यापन कराया गया, जिसमें ऋण पुस्तिका फर्जी पाई गई। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने जमानतदार के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना समेत विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, आर्म्स एक्ट के आरोपी शुभम बैस की जमानत के लिए योगेश्वर निषाद (36), निवासी बंधवापारा, सरकंडा ने जिला न्यायालय में स्वयं को जमानतदार बताते हुए एक ऋण पुस्तिका पेश की थी। दस्तावेज पर संदेह होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असलम खान के न्यायालय ने अतिरिक्त तहसीलदार से उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए।
जांच के दौरान सरकंडा हल्का नंबर-32 के पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ऋण पुस्तिका में दर्ज मौजा सरकंडा के खसरा नंबर 1270 और 1216 का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड से मिलान करने पर पता चला कि उक्त भूमि योगेश्वर निषाद के नाम पर दर्ज ही नहीं है। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपी को जमानत दिलाने के उद्देश्य से फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी।
अतिरिक्त तहसीलदार की अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने के बाद न्यायालय ने सिविल लाइन थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट आरक्षक रजनीकांत ओगरे की शिकायत पर पुलिस ने योगेश्वर निषाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336 और 340 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि मामले की विवेचना एएसआई मस्तराम कश्यप को सौंपी गई है। आरोपी की तलाश की जा रही है। पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार करने में और कौन-कौन शामिल था तथा क्या इस तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि इस गिरोह ने पहले भी ऐसे मामलों को अंजाम दिया है या नहीं।
