
बिलासपुर। तारबहार थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) बिलासपुर द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही शिकायतकर्ता मां-बेटी को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई जस्टिस राधाकृष्णन अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने जेएमएफसी के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी।
यह है पूरा मामला
दिसंबर 2024 में कोटा निवासी रुकमणी साहू और उनकी बेटी कोमल साहू ने श्रीराम फाइनेंस कंपनी के एजेंट सरोज उर्फ किशोर मरावी के खिलाफ मोबाइल पर अश्लील टिप्पणियां करने और रास्ते में लज्जा भंग करने की शिकायत तारबहार थाने में दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि 20 दिसंबर 2024 को जब वे थाने पहुंचे तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उनके खिलाफ ही मारपीट और गाली-गलौज का मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षक सरोज खलखो, संतोषी पाटनवार, आरक्षक मुरलीधर भार्गव, एएसआई संजय शर्मा तथा तत्कालीन थाना प्रभारी जेपी गुप्ता ने थाने के भीतर उनके साथ मारपीट की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और जान से मारने की धमकी दी।
जेएमएफसी कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए थे निर्देश
उच्च पुलिस अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मां-बेटी ने बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत जेएमएफसी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद जेएमएफसी ने 19 जनवरी 2026 को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए तारबहार थाना प्रभारी को पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर तीन दिनों के भीतर उसकी प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट में पुलिसकर्मियों ने दी चुनौती
जेएमएफसी के आदेश को चुनौती देते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी और अधिवक्ता अच्युत तिवारी ने दलील दी कि पुलिसकर्मियों ने अपनी शासकीय ड्यूटी का निर्वहन किया था। साथ ही यह भी तर्क रखा गया कि शिकायतकर्ताओं ने सीधे न्यायालय का रुख किया और बीएनएसएस के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जेएमएफसी के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए शिकायतकर्ता रुकमणी साहू और कोमल साहू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
