

बिलासपुर। सरकंडा स्थित बाल संप्रेषण गृह से चार नाबालिग अपचारियों के फरार होने और सुरक्षा गार्ड नरेंद्र खांडे की हत्या के मामले में 38 घंटे बाद भी आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। इधर, मृतक के परिजन मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी बाल संप्रेषण गृह के बाहर धरने पर बैठे रहे। उन्होंने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने के कारण दूसरे दिन भी शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि चारों नाबालिग पिछले करीब एक सप्ताह से फरार होने की योजना बना रहे थे। हत्या के मामले में बंद एक किशोर अन्य अपचारियों को भी भागने के लिए उकसा रहा था, लेकिन इसकी भनक प्रबंधन को नहीं लग सकी। रविवार रात मौका मिलते ही चारों ने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड नरेंद्र खांडे के हाथ पीछे बांध दिए, उसके मुंह में गमछा ठूंस दिया और उसकी हत्या करने के बाद फरार हो गए।
सीसीटीवी में एक ही बाइक पर भागते दिखे चारों
पुलिस को घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मिली है, जिसमें चारों आरोपी एक ही बाइक पर सवार होकर भागते दिखाई दे रहे हैं। जांच में उनके रायगढ़ की ओर जाने के संकेत मिले हैं। मुख्य आरोपी कोरबा का रहने वाला है, इसलिए पुलिस की दो विशेष टीमें रायगढ़ और कोरबा में तलाश कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों के पास अधिक पैसे नहीं हैं, इसलिए उनके ज्यादा दूर तक नहीं जा पाने की संभावना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग पर उठे सवाल
घटना के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 में भी इसी बाल संप्रेषण गृह में एक मौत हो चुकी थी। उस समय भी संबंधित अधिकारी के रूप में सुरेश सिंह पदस्थ थे। मृतक के परिजनों ने उन पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। यह भी सामने आया है कि मृतक गार्ड का स्थानांतरण हो चुका था, लेकिन उसे कार्यमुक्त नहीं किया गया था। वहीं हत्या के मुख्य आरोपी के बालिग होने के बावजूद उसे सेंट्रल जेल स्थानांतरित करने में हुई देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
चारों गंभीर अपराधों के आरोपी
फरार हुए चारों अपचारी अलग-अलग गंभीर मामलों में बाल संप्रेषण गृह में निरुद्ध थे। इनमें एक हत्या, एक चोरी, एक मादक पदार्थों की तस्करी तथा एक महिला से छेड़छाड़ और धमकी देने के मामले में बंद था।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बाल संप्रेषण गृह से नाबालिगों के फरार होने की यह पहली घटना नहीं है। वर्ष 2022 में भी यहां से दो नाबालिग फरार हो गए थे। वहीं 2020 में सरकंडा स्थित बालिका संरक्षण गृह से सात बालिकाओं के भागने की घटना सामने आई थी। दुर्ग बाल संप्रेषण गृह से भागे एक किशोर की हत्या का मामला भी प्रदेश में चर्चा का विषय रहा था।
परिजन बोले- पहले कहा बच्चे भागे हैं, फिर बताया भाई की हत्या हो गई
मृतक के भाई ने बताया कि सोमवार सुबह बाल संप्रेषण गृह के पर्यवेक्षक का फोन आया था। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि कुछ बच्चे भाग गए हैं। जब वह संप्रेषण गृह पहुंचे और कई बार अपने भाई के बारे में पूछा, तब कर्मचारियों ने बताया कि उनकी हत्या हो चुकी है। उन्होंने बताया कि रविवार रात करीब नौ बजे उनकी भाई से आखिरी बार बात हुई थी। नरेंद्र खांडे पिछले करीब एक वर्ष से संविदा पर सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थे और तखतपुर क्षेत्र के ग्राम अईबंद से प्रतिदिन ड्यूटी करने आते-जाते थे। परिजनों का कहना है कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं था और उन्हें कभी अंदेशा नहीं था कि उनके साथ ऐसी घटना हो जाएगी।
इस बीच पुलिस फरार चारों नाबालिगों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है, जबकि परिजन न्याय और पर्याप्त मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
