

बिलासपुर। सड़क सुरक्षा को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में यातायात पुलिस बिलासपुर ने नई पहल करते हुए जिले के 120 नागरिकों को “चेतना यातायात मितान” के रूप में चयनित किया है। पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने चयनित यातायात मितानों को सड़क सुरक्षा मितान किट, टी-शर्ट और कैप वितरित की। वहीं जिले के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों, एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के कार्यक्रम अधिकारियों को भी मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
यातायात पुलिस द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में चयनित मितानों को यातायात नियमों, सड़क दुर्घटना के दौरान गोल्डन ऑवर में प्राथमिक सहायता, घायलों के सुरक्षित रेस्क्यू, नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही हिट एंड रन मामलों में मिलने वाली क्षतिपूर्ति, राहगीर योजना और प्रधानमंत्री राहत योजना के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम), आई-रेड और ई-डार पोर्टल की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए सड़क दुर्घटनाओं के ऑनलाइन डेटा संकलन और उसके महत्व पर भी प्रकाश डाला।
यातायात पुलिस ने जिले के विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया, ताकि वे अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर सकें। इसी प्रकार एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के कार्यक्रम अधिकारियों को भी प्रशिक्षण देकर जनजागरूकता अभियान से जोड़ा गया।
नव चयनित “चेतना यातायात मितानों” को पहचान के लिए विशेष टी-शर्ट और कैप प्रदान की गई, जिससे आवश्यकता पड़ने पर वे संवेदनशील मार्गों पर यातायात पुलिस के सहयोगी के रूप में कार्य कर सकें।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे, डीएसपी शिवचरण परिहार, आरआई भूपेंद्र गुप्ता, आईटीएमएस के वाई. श्रीनिवास, एनआईसी के समीर चंद्राकर, सेवानिवृत्त उप निरीक्षक उमाशंकर पांडेय, शिक्षक मुकुल शर्मा, एनसीसी, एनएसएस एवं स्काउट-गाइड के कार्यक्रम अधिकारी, सड़क सुरक्षा समिति एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 300 से अधिक यातायात मितान, शिक्षक और नागरिक उपस्थित रहे।
