
बिलासपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाली सेवा सहकारी समिति मर्यादित पोड़ी करनकापा में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण वितरण में कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। आरोप है कि वर्ष 2026-27 के केसीसी ऋण वितरण में नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ किसानों को एक ही जमीन पर दोहरा (डबल) ऋण स्वीकृत किया गया, जबकि अन्य पात्र किसानों को ऋण देने से इनकार कर दिया गया। शनिवार को जांच अधिकारी वीरेंद्र टंडन ने समिति पहुंचकर ऋण संबंधी दस्तावेज जब्त किए और सात लोगों के बयान दर्ज किए।
शिकायतकर्ता चूनू राम, सूरज जायसवाल, सूरज कुमार, प्यारेलाल पटेल सहित अन्य किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि प्राधिकृत अधिकारी (सीईओ) कैलाश कश्यप और संस्था प्रबंधक खेमचंद कश्यप ने नियमों के विपरीत कुछ किसानों को उसी जमीन पर, जिस पर पहले से अन्य बैंक का केसीसी ऋण संचालित था, खाद और नकद ऋण स्वीकृत कर दिया। वहीं, जिन किसानों ने कथित तौर पर कमीशन नहीं दिया, उन्हें जमीन पहले से बंधक होने का हवाला देकर ऋण देने से मना कर दिया गया।
ग्रामीणों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष रजनीश सिंह से भी मामले की शिकायत की है। उनका आरोप है कि कैलाश कश्यप ने मुंगेली बैंक में पदस्थ अपने भाई खेमचंद कश्यप को अनाधिकृत रूप से पोड़ी बैंक में पदस्थ कराया। इसके अलावा बेलपान के ऑपरेटर टुकेश्वर कश्यप को भी पोड़ी बैंक में तैनात कर स्वयं प्राधिकृत अधिकारी के रूप में कार्य करने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पहले भी कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई प्रभावी जांच नहीं हुई।
शिकायत के साथ किसानों ने 25 लाभार्थियों को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध केसीसी ऋण स्वीकृत किए जाने से संबंधित दस्तावेज भी जांच के लिए सौंपे हैं।
दो-तीन दिन में सौंपेंगे जांच रिपोर्ट
जांच अधिकारी वीरेंद्र टंडन ने बताया कि समिति पहुंचकर लाभार्थियों से पूछताछ की गई है और ऋण संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। जांच प्रक्रिया पूरी होने में दो से तीन दिन और लगेंगे। इसके बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी जाएगी।
