
शशि मिश्रा

बिलासपुर। अपोलो अस्पताल में कथित रूप से फर्जी चिकित्सक के रूप में कार्यरत रहे नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम के मामले में जांच के दौरान कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। पीड़ित परिवारों ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया है कि मामूली पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे मरीजों की भी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कर दी गई, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बावजूद पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी, जिससे पीड़ित परिवारों में नाराजगी है।
तोरवा निवासी सुरेश डोडेजा ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनके पिता भगतराम डोडेजा को केवल पेट दर्द की शिकायत पर अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि नरेंद्र ने उनकी एंजियोप्लास्टी कर दी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
इसी तरह कश्यप कॉलोनी निवासी नीलम कुमार तिवारी ने बयान में कहा कि उनके पिता प्रभाकांत तिवारी को पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ थी। आरोप है कि फर्जी डॉक्टर नरेंद्र ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कर दी, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ गई। जब स्थिति गंभीर हुई तो उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। बाद में दूसरे अस्पताल में चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें हृदय संबंधी कोई बीमारी ही नहीं थी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की शिकायत नहीं करने के बदले अपोलो प्रबंधन ने चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया था। हालांकि बाद में प्रभाकांत तिवारी की भी मौत हो गई।
बताया गया कि ये घटनाएं वर्ष 2006 के दौरान हुई थीं, जब नरेंद्र अस्पताल में पदस्थ था। पीड़ितों का कहना है कि जांच में ये तथ्य सामने आने के बावजूद पुलिस ने अपोलो प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। साथ ही, नरेंद्र की नियुक्ति करने वाली तत्कालीन चयन समिति के सदस्यों को भी आरोपी नहीं बनाया गया।
फिलहाल इस मामले को लेकर पीड़ित परिवारों ने अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
