

दिलीप कुमार ।बहादुरपुर बस्ती।
बस्ती। बहादुरपुर ब्लॉक स्थित ऐतिहासिक मनोरमा नदी तट पर 3 जुलाई को ‘महुआ डाबर नरसंहार स्मृति दिवस’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर महुआ डाबर संग्रहालय के तत्वावधान में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीद हुए हजारों अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। कार्यक्रम में इतिहासकार, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल होंगे।
महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक डॉ. शाह आलम राना ने बताया कि 3 जुलाई 1857 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण और पीड़ादायक दिन है। उनके अनुसार अंग्रेजी सेना ने महुआ डाबर गांव को तीन ओर से घेरकर हजारों ग्रामीणों का निर्मम नरसंहार किया था। इसके बाद पूरे गांव को आग के हवाले कर सरकारी अभिलेखों में ‘गैरचिरागी’ घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना 1857 की सबसे बड़ी जनत्रासदियों में से एक मानी जाती है, लेकिन इसे इतिहास में अब तक अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका है।
डॉ. राना ने मांग की कि महुआ डाबर के शहीदों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जाए। उन्होंने ब्रिटेन सरकार से इस ऐतिहासिक जनसंहार के लिए औपचारिक माफी मांगने तथा भारत से ले जाई गई ऐतिहासिक धरोहरों को वापस करने की भी मांग उठाई। साथ ही केंद्र सरकार से 1857 में अंग्रेजों का साथ देने वालों की संपत्तियों पर ‘शत्रु सम्पत्ति अधिनियम’ की तर्ज पर कार्रवाई करने, महुआ डाबर में भव्य ‘शहादत कॉरिडोर’ विकसित करने और 1857 के शहीद परिवारों के सम्मान एवं संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि UP बोर्ड और NCERT की इतिहास पुस्तकों में महुआ डाबर नरसंहार को शामिल किया जाए तथा 3 जुलाई को ‘महुआ डाबर बलिदान दिवस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर घोषित किया जाए। डॉ. राना ने बताया कि राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के तहत इस स्थल को स्वतंत्रता संग्राम सर्किट में शामिल किया है और लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में स्मारक विकसित करने की घोषणा भी की थी, लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
