


बिलासपुर। रेलवे क्षेत्र स्थित जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की पवित्र स्नान पूर्णिमा श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। सुबह 8 बजे से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का 108 तांबे के कलशों के जल से महास्नान कराया गया। महास्नान के बाद परंपरा के अनुसार भगवान अनासार (विश्राम) काल में प्रवेश कर गए हैं। अब अगले 15 दिनों तक मंदिर का पट बंद रहेगा और भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष सेवा-पूजा की जाएगी।

मंदिर समिति के रातिकांति पात्रा ने बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान की स्नान यात्रा का विशेष महत्व है। सोमवार को सबसे पहले पहांडी की परंपरा निभाई गई, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। इसके बाद उन्हें सूती वस्त्र धारण कराकर पुष्पासन पर विराजित किया गया तथा सात पंडितों द्वारा 108 तांबे के कलशों के जल से महास्नान कराया गया। इस वर्ष मिट्टी के बजाय पीतल के कलशों से भगवान को स्नान कराया गया।

महास्नान के बाद मान्यता के अनुसार भगवान बुखार से पीड़ित हो जाते हैं। इसी कारण अब 15 दिनों तक मंदिर का पट बंद रहेगा और केवल मुख्य पुजारी ही भगवान की सेवा करेंगे। इस दौरान भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रतिदिन औषधीय काढ़े का भोग लगाया जाएगा तथा भक्तों को दर्शन नहीं होंगे।

मंदिर समिति के अनुसार 14 जुलाई को सुबह 6 से 7:40 बजे तक नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन का आयोजन होगा। इसके बाद मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाएगा और भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देंगे।

इसके बाद 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की गुंडिचा रथयात्रा निकलेगी। दोपहर 1 बजे से एसईसीएल के डायरेक्टर (टेक्निकल), पी एंड पी रमेशचंद्र मोहपात्रा छेरापहरा की रस्म निभाएंगे। दोपहर 2 बजे रथ मंदिर से रवाना होगा और भगवान नगर भ्रमण करते हुए शाम 6:30 बजे मौसी मां मंदिर पहुंचेंगे, जहां वे आठ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
वहीं, बहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को निकलेगी। इस अवसर पर राजा गोपाल कृष्ण राय पारंपरिक रूप से छेरापहरा की रस्म निभाएंगे। दोपहर 2 बजे रथ मौसी मां मंदिर से श्रीमंदिर के लिए रवाना होगा। भगवान उसी मार्ग से वापस लौटेंगे, जिस मार्ग से वे मौसी मां मंदिर गए थे। समिति ने बताया कि विशेष प्रसाद अर्पित करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को पहले मंदिर समिति से संपर्क करना होगा।

इधर, इस्कॉन बिलासपुर प्रचार केंद्र में भी भगवान जगन्नाथ का स्नान उत्सव मनाया गया। शाम 5 बजे भजन-कीर्तन, 5:30 बजे अभिषेक, 6:30 बजे राधाद्युति प्रभुजी द्वारा श्रीजगन्नाथ कथा, 7 बजे 56 भोग अर्पण तथा रात 8 बजे महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया।
