
बिलासपुर। कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में जांच आगे बढ़ने के साथ ही तहसील कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और मृतकों के परिजनों की मिलीभगत के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विधानसभा में मामला उठने के बाद शुरू हुई जांच में अब तक 15 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 14 मामलों में शहर के विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। एक अन्य मामले में तहसीलदार ने रतनपुर पुलिस को अपराध दर्ज करने के लिए पत्र भेजा है।
पिछले 24 दिनों के भीतर सरकंडा, तोरवा, सिविल लाइन, कोनी और कोतवाली थाना क्षेत्रों में कुल 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें सामान्य मौतों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्पदंश बताकर सरकारी मुआवजा हासिल करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना ही मुआवजे की राशि प्राप्त कर उसका बंटवारा कर लिया गया।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ता खांडेकर, बिल्हा निवासी रंजीत चतुर्वेदी सहित दर्जनभर से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। वहीं जांच का दायरा बढ़ने के साथ सिम्स तथा विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी चिकित्सक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
जानकारी के अनुसार, तहसील कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों, ड्राइवरों, चपरासियों और कुछ अधिवक्ताओं का एक नेटवर्क सक्रिय था, जो सामान्य मृत्यु को सर्पदंश साबित करने के लिए दस्तावेज तैयार कराने और मुआवजा स्वीकृत कराने में भूमिका निभाता था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था।
गौरतलब है कि 5 मार्च 2024 को विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि तीन वर्षों के दौरान बिलासपुर जिले में 431 मौतों को सर्पदंश बताकर लगभग 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा वितरित किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
तोरवा थाना क्षेत्र में दर्ज दो मामलों में एक अधिवक्ता सहित तीन आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा चुका है। वहीं सरकंडा थाना में पांच, सिविल लाइन और कोनी थाना में छह तथा कोतवाली थाना में एक मामला दर्ज किया गया है।
एडिशनल एसपी (सिटी) पंकज कुमार पटेल ने बताया कि दर्ज मामलों में ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने लालच देकर या अन्य तरीकों से सामान्य मौतों को सर्पदंश दर्शाने में भूमिका निभाई। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई और नाम सामने आने की संभावना है।
