
आकाश दत्त मिश्रा

बिलासपुर: सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा एक वीडियो के आधार पर सिपाही से कथित उगाही का मामला दर्ज कर कुछ पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर किए जाने के विरोध में पत्रकारों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष दिलीप यादव एवं वरिष्ठ पत्रकार इरशाद अली के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकार सिविल लाइन थाने के सामने धरने पर बैठे और विरोध रैली निकाली।
इस विरोध प्रदर्शन में केवल बिलासपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। पत्रकारों की एकजुटता ने आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को बल दिया।
पत्रकारों का कहना है कि एफआईआर में पत्रकार ज़िया उल हक और अनुज श्रीवास्तव को केवल किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनका नाम लिए जाने के आधार पर शामिल किया गया है। उनका दावा है कि जिस ऑडियो को मामले का आधार बताया जा रहा है, उसमें केवल एक चाय विक्रेता और सिपाही के बीच कथित लेन-देन की बातचीत सुनाई देती है तथा ऑडियो में दोनों पत्रकारों की आवाज़ कहीं सुनाई नहीं देती।
प्रदर्शनकारी पत्रकारों ने सवाल उठाया कि जब उपलब्ध ऑडियो साक्ष्य में दोनों पत्रकारों की कोई प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आती, तब उन्हें एफआईआर में नामजद करने का आधार क्या है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के केवल नाम लिए जाने मात्र से उसे आरोपी बना देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
