मॉनसून सिर पर, लेकिन आगर नदी अब भी भगवान भरोसे

आकाश दत्त मिश्रा


मुंगेली। शहर की जीवनदायिनी आगर नदी की हालत लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों का ध्यान अब तक इस ओर जाता नजर नहीं आ रहा। एंड्रज वार्ड के युवा पार्षद रोशन सोनी ने 28 अप्रैल को जिला और नगरीय प्रशासन को आवेदन देकर नदी की सफाई, गाद हटाने और जल प्रवाह ठीक कराने की मांग की थी, लेकिन एक महीना गुजरने के बाद भी अब तक जमीन पर एक कदम तक नहीं उठाया गया है।
आवेदन में साफ कहा गया था कि नदी में लगातार कचरा और गाद जमा होने से बीच में मिट्टी का बड़ा टापू बन गया है, जिससे पानी रुक रहा है। आने वाले दिनों में यही गंदगी, बदबू, मच्छर और बीमारियों की वजह बन सकती है। मॉनसून अब दरवाजे पर खड़ा है, लेकिन नदी की सफाई को लेकर प्रशासन की तैयारी कहीं नजर नहीं आ रही।


लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर नदी की सफाई और दुरुस्तीकरण के लिए जो रकम आई है, उसका इस्तेमाल कब होगा? शहर में बड़े-बड़े पढ़े-लिखे अधिकारियों की पूरी टीम बैठी है, लेकिन आगर नदी की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा।


पिछली बार कुछ सामाजिक और पर्यावरण प्रेमी संस्थाएं भी बड़े जोश के साथ प्रशासन के साथ नदी साफ करने उतरी थीं। फोटो खिंचे, अभियान चला, बातें हुई,लेकिन कुछ दिन बाद पूरा मामला ठंडा पड़ गया और नदी फिर उसी हाल में छोड़ दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की पहली प्राथमिकता नदी होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन फिलहाल बेजा कब्जा हटाने और दूसरी कार्रवाइयों में ज्यादा उलझा नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि अगर अभी सफाई और डी-सिल्टिंग शुरू नहीं हुई तो बारिश में हालात और बिगड़ सकते हैं।
शहरवासियों ने मांग की है कि अब सिर्फ कागजी बातें और बैठकों से काम नहीं चलेगा, प्रशासन को आगर नदी बचाने के लिए मैदान में उतरकर तुरंत काम शुरू करना चाहिए।

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