
बिलासपुर। बिजौर स्थित हर्ष फोनिक्स सिटी कॉलोनी में भारी बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर बिल्डर और ग्रामीणों के बीच नाले का विवाद गहरा गया है। ग्रामीण जहां कॉलोनी निर्माण को जलभराव के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा खामियाजा कॉलोनी के सैकड़ों रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क की खुदाई के कारण कॉलोनी का मुख्य मार्ग बाधित हो गया है और चारपहिया वाहनों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।
शुक्रवार को हुई तेज बारिश के बाद बिजौर के कई घरों में घुटनों तक पानी भर गया और सड़कें जलमग्न हो गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर हर्ष फोनिक्स सिटी विकसित की गई है, वहां पहले प्राकृतिक नाला था, जिसे निर्माण के दौरान बाधित कर दिया गया। उनका कहना है कि खमतराई की ओर से आने वाला वर्षा जल पहले इसी मार्ग से निकलता था, लेकिन अब पानी की निकासी प्रभावित होने से हर बारिश में जलभराव की स्थिति बन रही है।
ग्रामीणों की शिकायत पर बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान जेसीबी से कॉलोनी के प्रवेश मार्ग की खुदाई कराई गई। खुदाई में नीचे नाली नुमा जलनिकासी मार्ग होने की बात सामने आई, लेकिन सड़क क्षतिग्रस्त होने से अब वहां केवल दोपहिया वाहन ही निकल पा रहे हैं। स्कूल बसें और वैन कॉलोनी के भीतर नहीं पहुंच रही हैं, जिससे अभिभावकों को बच्चों को मुख्य सड़क तक पैदल छोड़ना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और चारपहिया वाहन मालिकों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
रहवासियों का कहना है कि जलनिकासी की समस्या का समाधान आवश्यक है, लेकिन इसके लिए स्थायी और तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि सड़क खोद देना तात्कालिक उपाय हो सकता है, लेकिन इससे एक नई समस्या पैदा हो गई है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और बिल्डर को मिलकर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे जलनिकासी भी सुचारु रहे और आवागमन भी प्रभावित न हो।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद मौके का निरीक्षण किया गया है। बिल्डर से कॉलोनी का ले-आउट मांगा गया है तथा नगर निगम को भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिजौर में जलभराव रोकने के लिए 20 लाख रुपये की लागत से नाला निर्माण की स्वीकृति दी गई है। जांच के बाद निगम के इंजीनियर तय करेंगे कि नाला किस दिशा से बनाया जाएगा।
हालांकि इस पूरे मामले का एक दूसरा पक्ष भी सामने आ रहा है। शहरी विकास और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी निजी भूमि से वर्षों से प्राकृतिक रूप से वर्षा जल बहता रहा हो, तो मात्र उसी आधार पर उस भूमि पर निर्माण को अवैध नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि शहरों के विस्तार के साथ जलनिकासी की समुचित व्यवस्था विकसित करना प्रशासन और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि 17 जुलाई को बिलासपुर में हुई अत्यधिक बारिश असाधारण थी, जिसके कारण शहर के अनेक इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। ऐसे में केवल एक कॉलोनी या बिल्डर को पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय यह जांच जरूरी है कि जलनिकासी तंत्र, नालों की क्षमता और शहरी नियोजन में कहीं कोई व्यापक कमी तो नहीं है।
ऐसे में स्पष्ट है कि विवाद का स्थायी समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि तकनीकी सर्वे, निष्पक्ष जांच और वैज्ञानिक तरीके से जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने से ही संभव होगा, ताकि भविष्य में न तो ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव हो और न ही कॉलोनी के रहवासियों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़े।
