
एक्टिवा को मारी भीषण टक्कर, कई फीट हवा में उछला छात्र; इलाज के दौरान मौत, लोगों में आक्रोश

बिलासपुर। शहर में नाबालिगों के हाथों में कार की चाबी थमाने की लापरवाही एक बार फिर एक परिवार की जिंदगी पर भारी पड़ गई। रविवार सुबह वेयर हाउस रोड पर तेज रफ्तार कार चला रहे एक नाबालिग ने 11वीं कक्षा के छात्र की एक्टिवा को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि छात्र कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर जा गिरा। गंभीर रूप से घायल छात्र को पहले सिम्स और फिर अपोलो अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें पूरी घटना कुछ ही सेकंड में घटित होती दिखाई दे रही है।
मंगला स्थित अभिषेक विहार निवासी रुद्र प्रताप शर्मा (17), पिता मुकेश शर्मा, महर्षि स्कूल में कक्षा 11वीं का छात्र था। रविवार सुबह करीब 7:30 बजे वह एक्टिवा से वेयर हाउस रोड होते हुए जा रहा था। संजीवनी हॉस्पिटल तिराहे के पास विपरीत दिशा से लगभग 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही कार ने उसकी एक्टिवा को भीषण टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार में चार नाबालिग छात्र सवार थे और वाहन भी एक नाबालिग चला रहा था। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रुद्र कई फीट हवा में उछलकर सिर के बल सड़क पर गिरा, जबकि उसकी एक्टिवा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद अनियंत्रित कार सामने से आ रही स्कूल मिनी बस क्रमांक सीजी-10-बीएन-8858 से जा भिड़ी, जिससे कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना के तुरंत बाद आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने तत्काल एंबुलेंस बुलाकर घायल छात्र को सिम्स पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
नाबालिग चालक पर मामला दर्ज, कोर्ट में किया जाएगा पेश

सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार तथा मिनी बस को जब्त कर लिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू की। थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि कार चला रहे नाबालिग को विधिक प्रक्रिया के तहत पकड़कर बाद में मुचलके पर छोड़ा गया है। उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। पुलिस के अनुसार कार कंचन पांडेय के नाम पर पंजीकृत है। वाहन चालक के साथ-साथ वाहन स्वामी एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पढ़ाई और खेल में था होनहार
रुद्र प्रताप शर्मा मूल रूप से पेंड्रा का रहने वाला था। हादसे के बाद परिजन उसका शव लेकर पेंड्रा रवाना हो गए। स्कूल प्रबंधन के अनुसार रुद्र पढ़ाई में मेधावी छात्र था। वह स्कूल के बैंड ग्रुप का सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ वॉलीबॉल का अच्छा खिलाड़ी भी था। उसकी असमय मौत से स्कूल और परिचितों में शोक का माहौल है।

शहर में तय है 20 से 25 किमी प्रति घंटा की गति सीमा
शहर की सड़कों पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने पर दोपहिया वाहन चालकों पर 1000 रुपये और कार चालकों पर 2000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है। खतरनाक ड्राइविंग पर 5000 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन तथा गंभीर मामलों में दो वर्ष तक की सजा का भी प्रावधान है।

नाबालिगों की लापरवाही पहले भी ले चुकी है कई जानें
- 2 मार्च 2026: लालखदान में नाबालिग की कार की टक्कर से दो लोग गंभीर घायल हुए।
- 8 मई 2024: दयालबंद में नाबालिग स्कूटी चालक ने महिला को टक्कर मारी, बाद में स्वयं बस की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई।
- 20 फरवरी 2023: लिंक रोड पर 16 वर्षीय नाबालिग की कार से महिला मजदूर की मौत हुई, जबकि आठ लोग घायल हुए।
आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में शहर के भीतर तेज रफ्तार के कारण सड़क दुर्घटनाओं में 33 लोगों की जान जा चुकी है।
सवाल व्यवस्था पर भी

यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद नाबालिगों के हाथों में वाहन पहुंचने पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। कई मामलों में संपन्न परिवार अपने नाबालिग बेटों को कार की चाबी सौंप देते हैं, जिसके बाद वही वाहन शहर की सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ते हैं और निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं।
मोटर वाहन अधिनियम में नाबालिग से वाहन चलवाने पर वाहन स्वामी और अभिभावक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसी कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि नियमों का भय समाप्त होता जा रहा है और हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। शहर के नागरिकों का मानना है कि जब तक नाबालिगों को वाहन उपलब्ध कराने वाले अभिभावकों और वाहन मालिकों के खिलाफ कठोर एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी दर्दनाक घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
