

बिलासपुर। आस्था, परंपरा और श्रद्धा का विराट उत्सव मानी जाने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा इस वर्ष 108 वर्ष पूरे कर रही है। शहर की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल यह ऐतिहासिक रथयात्रा 16 जुलाई को पूरे धार्मिक उल्लास के साथ निकाली जाएगी। कभी बैलगाड़ी पर निकलने वाली महाप्रभु की यात्रा आज भव्य एवं सुसज्जित रथों पर नगर भ्रमण करती है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह आज भी उतना ही अटूट है।

रथयात्रा को लेकर शहर के प्रमुख मंदिरों—सिम्स चौक स्थित पराशर मंदिर, गोंड़पारा के दर्जी मंदिर, जूना बिलासपुर के राधा-कृष्ण मंदिर तथा रेलवे स्थित जगन्नाथ मंदिर—में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। रेलवे जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के नवीन वस्त्र, मुकुट और रथ पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है तथा महाप्रभु के स्वागत के लिए रंगोली और अल्पना बनाई जा रही है।
108 वर्ष पहले बैलगाड़ी से हुई थी शुरुआत

पराशर मंदिर से जुड़े गोपाल दुबे ने बताया कि बिलासपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुरुआत लगभग 108 वर्ष पूर्व सिम्स चौक स्थित पराशर मंदिर से हुई थी। उस समय भगवान जगन्नाथ बैलगाड़ी पर सवार होकर नगर भ्रमण करते थे। यात्रा घोंघा बाबा मंदिर तक जाती थी, जहां भगवान तीन से चार दिनों तक विराजमान रहते थे। समय के साथ यात्रा का स्वरूप बदलता गया और अब महाप्रभु भव्य रथों एवं विशेष रूप से सजाए गए वाहनों पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।

गोपाल दुबे ने बताया कि उनके परिवार की सातवीं पीढ़ी इस ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन कर रही है। 16 जुलाई को शाम 4 बजे पराशर मंदिर से रथयात्रा निकलेगी, जो सदर बाजार, गोलबाजार, मध्यनगरीय चौक, जूनी लाइन और कंपनी गार्डन होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी। यहां महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा।
रेलवे जगन्नाथ मंदिर से निकलेगी सबसे बड़ी शोभायात्रा
शहर की सबसे बड़ी और सर्वाधिक श्रद्धालुओं वाली रथयात्रा रेलवे स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकलेगी। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु महाप्रभु की आरती उतारेंगे, पुष्पवर्षा करेंगे तथा रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
नगर भ्रमण के बाद भगवान मौसी मां मंदिर पहुंचेंगे, जहां परंपरा के अनुसार नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, संध्या आरती, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है।
इस बार रथ में विशेष व्यवस्था
रेलवे जगन्नाथ मंदिर समिति ने इस वर्ष रथ में विशेष तकनीकी बदलाव भी किए हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए रथ में नया ब्रेक सिस्टम तैयार किया जा रहा है, ताकि रथ नियंत्रित गति से चले और महाप्रभु भक्तों को सहज रूप से दर्शन दे सकें। रथ खींचने के लिए लगभग 100 मीटर लंबी रस्सी लगाई जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ रथ खींच सकेंगे।

समिति के अनुसार इस वर्ष रथ को नौ दिनों तक मौसी मां मंदिर के बाहर ही रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन कर सकें।
दर्जी मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर से भी निकलेगी रथयात्रा
गोंड़पारा स्थित दर्जी मंदिर और जूना बिलासपुर के राधा-कृष्ण मंदिर से भी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार रथयात्रा निकाली जाएगी। इन मंदिरों से निकलने वाली यात्राएं नगर भ्रमण करते हुए व्यंकटेश मंदिर पहुंचेंगी, जहां विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती एवं भेंट अर्पण के बाद भगवान को विधिवत विदाई दी जाएगी।
श्रद्धा और संस्कृति का महापर्व
रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिलासपुर की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 108 वर्षों से लगातार चली आ रही यह परंपरा आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। महाप्रभु के नगर भ्रमण के दौरान पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है और श्रद्धालु रथ खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं के रथयात्रा में शामिल होने की संभावना है।
