
बिलासपुर। शहर के तारबाहर थाना क्षेत्र में फ्लैट दिलाने के नाम पर 23 लाख रुपये के होम लोन में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर पुलिस ने बिल्डर और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, तारबाहर स्थित विनायका हाइट्स निवासी चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने वालिया कंस्ट्रक्शन के प्रमोटर राजेश सेठ और रजनी सेठ से विनायका हाइट्स के फ्लैट क्रमांक-402 को 30 लाख रुपये में खरीदने का अनुबंध किया था। बिल्डर ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से आसानी से होम लोन दिलाने का भरोसा दिलाया और बैंक के तत्कालीन प्रबंधक शशि भूषण कर्ण सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कराई।
शिकायत के मुताबिक आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद करीब 23 लाख रुपये का होम लोन स्वीकृत हुआ, लेकिन उनकी लिखित सहमति के बिना पूरी ऋण राशि सीधे बिल्डर राजेश सेठ और रजनी सेठ के खातों में स्थानांतरित कर दी गई। 18 फरवरी 2017 को फ्लैट की रजिस्ट्री शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी के नाम पर कर दी गई तथा एक वर्ष के भीतर फ्लैट तैयार कर सौंपने का आश्वासन दिया गया, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2019 में बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई संबंधी नोटिस और अखबार में प्रकाशित सूचना से उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बिल्डर और बैंक अधिकारियों से संपर्क कर समाधान का प्रयास किया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
मामले की जांच के बाद तारबाहर थाना पुलिस ने राजेश सेठ, रजनी सेठ, तत्कालीन बैंक प्रबंधक शशि भूषण कर्ण, अपर्णा विश्वास, नितिन निगम, जाली बी. फिलिप्स सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जाएगी।
