
बिलासपुर। कोनी स्थित करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को राज्य सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की तैयारी कर रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रक्रिया तेज कर दी है। शासन की ओर से कंसल्टेंट कंपनी केपीएमजी से आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए जा चुके हैं और अब टेंडर प्रोसेसिंग कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस निर्णय को लेकर कांग्रेस ने अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने 23 जून को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को पत्र भेजकर बताया कि कोनी स्थित 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले कैंसर केयर अस्पताल का संचालन पीपीपी मॉडल पर कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए संशोधित रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी), लाइसेंस एग्रीमेंट और वित्तीय मॉडलिंग के दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं। अब टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में बेलतरा विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विजय केशरवानी, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने सरकार के निर्णय का विरोध किया।
विजय केशरवानी ने कहा कि जब अस्पताल सरकारी जमीन पर जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया है और उपकरण भी सरकारी हैं, तो इसके संचालन के लिए निजी संस्था की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उनका आरोप है कि पीपीपी मॉडल लागू होने से भविष्य में गरीब मरीजों के लिए इलाज महंगा हो सकता है और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा अक्टूबर 2024 में अस्पताल के लोकार्पण और मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। उन्होंने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर अस्पताल में स्वीकृत और भरे गए पदों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि यदि अस्पताल निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित हुआ तो उपचार का खर्च बढ़ने की आशंका है, जिससे सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा।
जगदलपुर मॉडल का दिया उदाहरण
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि जगदलपुर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पीपीपी मॉडल लागू होने के बाद ओपीडी शुल्क 450 रुपये तथा एमआरआई जांच का शुल्क लगभग 9 हजार रुपये लिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि बिलासपुर में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू हुई तो गरीब, मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
विधायक बोले— आयुष्मान योजना से मिलेगा लाभ
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बिलासपुर में जगदलपुर जैसी व्यवस्था लागू नहीं होगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का उपचार किया जाएगा। संचालन के लिए ऐसी निजी एजेंसी का चयन करने का प्रस्ताव है, जो विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के वेतन का वहन कर सके।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों और अनुभवी नर्सिंग स्टाफ का वेतन सामान्य आयुष्मान पैकेज से पूरा नहीं हो पाता, इसलिए इस अंतर की भरपाई के लिए शासन से वित्तीय सहयोग का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
आईपीडी सेवा शुरू होने में हुई देरी पर विधायक ने कहा कि अस्पताल संचालन के लिए दो स्वशासी समितियां बनाई गई हैं और सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट तैयार है, कैथ लैब योजना में शामिल है तथा फिलहाल सिम्स की दो एंबुलेंस अस्पताल में उपलब्ध हैं। अस्पताल पूर्ण रूप से शुरू होने पर अलग एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रक्रिया जारी है और मामला शासन स्तर पर लंबित है।
वर्षों बाद भी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकीं सुविधाएं
कोनी का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल वर्ष 2014 में शिलान्यास के बाद लंबे समय तक निर्माण में देरी का सामना करता रहा। निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ और 2021 तक पूरा होना था, लेकिन वर्ष 2024 में अधूरी तैयारियों के साथ इसका लोकार्पण किया गया। अस्पताल में स्थापित कई आधुनिक मशीनें वर्षों तक उपयोग में नहीं आ सकीं। वर्तमान में भी कैथ लैब, पूर्ण आईपीडी सेवा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में अस्पताल के पीपीपी मॉडल पर संचालन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
