
बिलासपुर। जिले में बिजली विभाग के 330 संविदा कर्मचारियों की पिछले 10 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। आंधी-बारिश के मौसम में फॉल्ट सुधार, पेट्रोलिंग और मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होने से बिजली बहाल करने में पहले की तुलना में कई गुना अधिक समय लग रहा है। इससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। उनके कार्य से दूर रहने के कारण नियमित लाइनमैनों को अकेले ही सभी तकनीकी और मैदानी जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। बिजली लाइनों में फॉल्ट ढूंढना, टूटे तारों की मरम्मत, पेड़ों की डालियां हटाना, उपकरणों का परिवहन और पोल पर चढ़कर कार्य करने जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों के अनुसार पहले जो कार्य लगभग 30 मिनट में पूरा हो जाता था, अब उसे पूरा करने में दो से तीन घंटे तक लग रहे हैं।
नियमित लाइनमैनों का कहना है कि संविदा कर्मचारियों की अनुपस्थिति में अकेले पोल पर चढ़कर काम करना जोखिम भरा है। सुरक्षा कारणों से भी कार्य की गति धीमी हो गई है, जिससे किसी भी क्षेत्र में बिजली बाधित होने पर आपूर्ति सामान्य होने में काफी समय लग रहा है।
बिजली विभाग के कार्यपालक निदेशक एके अंबस्थ ने स्वीकार किया कि दिन के समय एडवांस टेंडर के ठेकेदारों के कर्मचारियों की मदद से किसी तरह काम चलाया जा रहा है, लेकिन रात के समय स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश संविदा कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, इसलिए रात में वैकल्पिक व्यवस्था करना कठिन हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इधर, सोमवार को आई आंधी और बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में देर रात तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के मामले को लेकर हाई कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से बताया गया कि स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारियों से ही काम चलाया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
उल्लेखनीय है कि सोमवार शाम आई आंधी और बारिश के बाद बिलासपुर के कई क्षेत्रों में रात करीब तीन बजे तक बिजली आपूर्ति ठप रही थी। इससे नाराज नागरिकों ने नेहरू नगर जोन कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। विभाग का कहना है कि लाइन स्टाफ सुबह तक लगातार मरम्मत कार्य में जुटा रहा, लेकिन सीमित संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण बिजली बहाल करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।
