
शशि मिश्रा
बिलासपुर। नगर निगम में अधिकारियों और इंजीनियरों के लिए सरकारी वाहनों की कमी को देखते हुए महापौर परिषद (एमआईसी) ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब जिन उपायुक्तों, जोन कमिश्नरों और इंजीनियरों को सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं हैं, वे अपने निजी कार का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए कर सकेंगे। इसके बदले नगर निगम प्रत्येक माह 80 लीटर पेट्रोल या डीजल उपलब्ध कराएगा।
गुरुवार शाम आयोजित एमआईसी बैठक में बताया गया कि निगम के कई वाहन पुराने और अनुपयोगी हो चुके हैं। वहीं अनेक अधिकारियों और इंजीनियरों के पास सरकारी वाहन नहीं होने से उन्हें कार्यालय और फील्ड के कार्यों के लिए अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए एमआईसी ने ईंधन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव मंजूर किया, ताकि अधिकारियों को सरकारी कार्य के लिए अपने निजी खर्च से पेट्रोल या डीजल नहीं भरवाना पड़े।
बैठक में इसके अलावा कुछ वाहन चालकों की तदर्थ नियुक्ति की अवधि बढ़ाने, प्लेसमेंट श्रमिकों की नियुक्ति संबंधी निविदा तथा विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। इनमें कुंदन पैलेस से पुराने बस स्टैंड तक आरआरसी ड्रेन निर्माण, सड़क एवं नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के टेंडर भी शामिल हैं।
पहली बार एमआईसी बैठक की हुई वीडियोग्राफी
नगर निगम में पिछले कुछ समय से एमआईसी बैठकों के दौरान विभिन्न मुद्दों पर हंगामे और महापौर तथा एमआईसी सदस्यों के बीच विवाद की स्थिति बनती रही है। इसे देखते हुए इस बार पहली बार पूरी एमआईसी बैठक की वीडियोग्राफी कराई गई। इससे पहले केवल सामान्य सभा की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग होती थी। अधिकारियों का मानना है कि रिकॉर्डिंग के कारण बैठक शांतिपूर्ण रही और किसी प्रकार का विवाद या हंगामा नहीं हुआ।
