
यूनुस मेमन

रतनपुर। नगर पालिका परिषद रतनपुर में इन दिनों अंदरूनी खींचतान की चर्चा जोरों पर है। नल-जल विभाग में पदस्थ कर्मचारी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नगर की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद के भाजपा एवं कांग्रेस पार्षदों ने एकजुट होकर कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से हटाकर अन्य विभाग में पदस्थ करने की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 21 मई 2026 को नगर पालिका रतनपुर के नल-जल विभाग में पदस्थ कर्मचारी टेगनूराम सारथी की कार्यप्रणाली को लेकर पार्षदों द्वारा नगर पालिका सीएमओ श्री सुखसागर खुटे को लिखित शिकायत दी गई थी। पार्षदों का आरोप है कि कर्मचारी की कार्यशैली के कारण नगर के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा आम जनता की समस्याओं और शिकायतों का जवाब पार्षदों को देना पड़ता है।
पार्षदों ने बताया कि उनके द्वारा सीएमओ से निवेदन किया गया था कि उक्त कर्मचारी को अन्य विभाग में कार्य सौंपा जाए, लेकिन लंबे समय बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से उन्हें कलेक्टर के समक्ष ज्ञापन सौंपने के लिए मजबूर होना पड़ा।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर पालिका रतनपुर की राजनीति में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नगर पालिका अध्यक्ष लव कुश कश्यप भाजपा से हैं, लेकिन इसके बावजूद भाजपा के पार्षद, उपाध्यक्ष और कांग्रेस पार्षदों का एक साथ आकर जिला प्रशासन के सामने अपनी बात रखना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नगर में चर्चा है कि अध्यक्ष की “एकला चलो नीति” से कई पार्षद नाराज चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब अपने ही पार्टी के पार्षदों की बातों को उचित महत्व नहीं मिल रहा है तो परिषद के अंदर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि इस मामले में अध्यक्ष पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नगर पालिका परिषद में जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी होता है, लेकिन यदि किसी कर्मचारी के विभाग परिवर्तन जैसे मामले को लेकर पार्षदों को कलेक्टर तक जाना पड़े तो यह परिषद के अंदर आपसी समन्वय की स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि कलेक्टर बिलासपुर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और नगर पालिका रतनपुर में चल रही इस अंदरूनी खींचतान का समाधान किस तरह निकलता है।
