

बिलासपुर। अधिकमास और मिथुन संक्रांति की समाप्ति के साथ विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर लगी रोक अब हटने जा रही है। पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर के अनुसार 19 जून से विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत तथा नए कार्यों के शुभारंभ का दौर शुरू होगा, जो जुलाई के तीसरे सप्ताह तक जारी रहेगा।
सोमवार को अधिकमास समाप्त होने के बाद 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास का प्रारंभ हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, पीपल पूजन, दान-पुण्य तथा भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा 29 जून को सोमवार और पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग बनने से श्रद्धालुओं को विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होगा।
पंडितों के अनुसार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके कारण विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य अगले चार माह तक वर्जित रहेंगे। नवंबर में देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
जून के प्रमुख विवाह मुहूर्त
19, 20, 22, 23, 24, 26, 27 और 29 जून को विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
जुलाई के प्रमुख विवाह मुहूर्त
1, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11 और 12 जुलाई को विवाह के मुख्य मुहूर्त रहेंगे। वहीं 22 जुलाई को अबूझ सावा होने के कारण बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चातुर्मास शुरू होने से पहले सीमित अवधि में उपलब्ध इन शुभ मुहूर्तों के चलते विवाह समारोहों में विशेष रौनक देखने को मिलेगी।
