

बिलासपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम शहर का निरीक्षण कर लौट चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार के नए कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने की दिशा में नगर निगम की तैयारी अभी अधूरी है। शहर के लगभग 1.29 लाख मकानों और दुकानों तक अब तक चार रंगों वाले डस्टबिन नहीं पहुंच पाए हैं, जबकि नए नियमों के तहत कचरे को चार श्रेणियों—गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और सैनिटरी वेस्ट—में अलग-अलग रखना अनिवार्य किया गया है।
केंद्र सरकार का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक निपटान, रिसाइकिलिंग को बढ़ावा देने और पर्यावरणीय नुकसान को कम करना है। इसके बावजूद नगर निगम अभी तक शहरवासियों को चार रंगों वाले डस्टबिन उपलब्ध नहीं करा सका है। निगम ने डस्टबिन खरीदी की योजना तो तैयार कर ली है, लेकिन प्रस्ताव मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) में नहीं पहुंचने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
वर्तमान में अधिकांश घरों और दुकानों में केवल दो डस्टबिन की व्यवस्था है, जिनमें गीला और सूखा कचरा अलग किया जाता है। वहीं कचरा संग्रहण करने वाली अधिकांश गाड़ियों में भी केवल दो प्रकार के कचरे के संग्रहण की सुविधा है। कुछ वाहनों में चार सेक्शन बनाकर औपचारिकता पूरी की गई है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर पुरानी व्यवस्था ही जारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण लागू करने के लिए केवल डस्टबिन वितरण पर्याप्त नहीं होगा। नगर निगम को कचरा संग्रहण वाहनों, परिवहन व्यवस्था और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी व्यापक बदलाव करने होंगे, ताकि अलग-अलग श्रेणियों का कचरा पृथक रूप से प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंच सके।
निगम सूत्रों के मुताबिक चार रंगों वाले डस्टबिन की खरीदी के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया है। एमआईसी से मंजूरी मिलने के बाद ही खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के दौरे के दौरान तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया था, लेकिन टीम के लौटने के बाद व्यवस्था सुधार की गति धीमी पड़ती दिखाई दे रही है।
इस संबंध में मेयर पूजा विधानी ने कहा कि डस्टबिन खरीदी की योजना तैयार की जा रही है। एमआईसी में प्रस्ताव आने के बाद खरीदी प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को सभी कचरा संग्रहण वाहनों में चार अलग-अलग सेक्शन विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नागरिक चार प्रकार के कचरे को अलग-अलग दे सकें।
शहर में चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण की व्यवस्था तभी सफल होगी, जब घरों से लेकर कचरा गाड़ियों और प्रोसेसिंग सेंटर तक पूरी प्रणाली एक साथ विकसित और संचालित की जाए। फिलहाल संसाधनों की कमी के कारण नई व्यवस्था का क्रियान्वयन चुनौती बना हुआ है।
