स्वास्थ्य विभाग की ‘धक्का मार’ व्यवस्था से हर दिन मानवता हो रही तार- तार

शशि मिश्रा

बिलासपुर

शवों को घर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने शव वाहनों का बंदोबस्त किया है लेकिन इन वाहनों का संचालन धक्का मार तरीके से किया जाता है। कंडम हो चुके वाहनों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है, लेकिन इससे परिजनों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

तस्वीर सिम्स अस्पताल के मरच्यूरी की है। जहां राजेश पटेल उम्र 60 वर्ष पिछले 4 घंटे से अपने मृत बेटे अमन पटेल के शव को ले जाने के लिए कर्मचारियों से मिन्नतें कर रहे थे। बताया गया है कि उन्होंने शव को ले जाने के लिए 1099 में कॉल लगाकर शव वाहन की मांग की थी, इसपर शव वाहन लाया गया, लेकिन बेटे के शव को कंडम वाहन में रहने के बाद वाहन चालू ही नहीं हो सकी, इसके बाद परिजन को बुलाकर धक्का लगाया गया है। करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद भी वाहन स्टार्ट नहीं हो सका। जिसके बाद दूसरे वाहन की व्यवस्था की गई, कंडम वाहन से शव को उतारा गया और दूसरे वाहन से शव लेकर बुजुर्ग रवाना हो सके। इस दौरान बुजुर्ग बाप की आंखों में बेटे के लिए आंसू और धक्का मार व्यवस्था के लिए शर्म दिख रही थी। एक बाप के आंखों के सामने सिस्टम की लाचारी और शव का तमाशा बनते देख किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है।

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