नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में राजस्व अमला एकजुट, बिलासपुर जिले में 2000 से अधिक मामले प्रभावित

बिलासपुर। सरगुजा में पदस्थ एक नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की कलमबंद हड़ताल का असर अब पूरे प्रदेश में दिखाई देने लगा है। बिलासपुर जिले की 11 तहसीलों में राजस्व कार्य लगभग ठप हो गए हैं, जिससे तीन दिनों में करीब 2000 मामलों की सुनवाई और राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हुए हैं। अकेले बिलासपुर तहसील में लगभग 450 मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी है।

संघ के आंदोलन को छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ और राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ का भी समर्थन मिल गया है। पटवारियों के आंदोलन में शामिल होने से खाता विभाजन, सीमांकन, रिकॉर्ड दुरुस्ती, नामांतरण सहित जाति, आय, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

नेहरू चौक स्थित तहसील कार्यालय सहित जिले के अन्य तहसील कार्यालयों में हड़ताल के कारण सन्नाटा पसरा रहा। आम दिनों में जहां बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं, वहीं अब अधिकांश काउंटर और न्यायालय बंद पड़े हैं।

बिलासपुर तहसील में रोजाना 150 मामलों की सुनवाई प्रभावित

बिलासपुर तहसील में तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के कुल छह राजस्व न्यायालय संचालित होते हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 150 मामलों की सुनवाई होती है। हड़ताल के चलते शुक्रवार, सोमवार और मंगलवार को करीब 450 मामलों की सुनवाई टल गई। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।

दोषियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि राजस्व अधिकारी लगातार जनता की सेवा करते हैं, लेकिन भय और असुरक्षा के माहौल में कार्य करना संभव नहीं है। संघ दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के आगामी निर्णय तक कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

राजस्व अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। रायगढ़ जिला मुख्यालय में जमीन नामांतरण के एक मामले को लेकर वकीलों और राजस्व अमले के बीच विवाद हिंसक हो गया था, जिसमें नायब तहसीलदारों के साथ मारपीट की घटना हुई थी। उस समय भी प्रदेशभर के राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

4 जून से राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी भी हड़ताल पर

इधर, राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ ने भी मामले में कड़ा रुख अपनाया है। फिलहाल अधिकारी काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। संघ के प्रतिनिधियों ने कमिश्नर को मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 4 जून से राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी भी हड़ताल पर चले जाएंगे।

राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के आंदोलन के कारण जिले में लंबित प्रकरणों का बोझ बढ़ने लगा है, जबकि आम नागरिकों को जरूरी प्रमाण पत्र और राजस्व सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच समाधान निकलने तक स्थिति सामान्य होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!