
बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में एक महिला शोधार्थी द्वारा प्रयोगशाला से खतरनाक केमिकल ले जाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने के चार दिन बाद भी केमेस्ट्री विभाग विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच रिपोर्ट नहीं सौंप पाया है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और लैब प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं एहतियात के तौर पर यूजी, पीजी और शोधार्थियों के लिए संचालित तीन प्रमुख प्रयोगशालाओं का संचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार सरगुजा संभाग के उदयपुर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला रिसर्च स्कॉलर 29 मई को केमेस्ट्री विभाग की प्रयोगशाला से चुपचाप एक खतरनाक केमिकल लेकर विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी पहुंची थी। वहां उसने केमिकल का सेवन कर लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे उल्टियां होने लगीं। मौके पर मौजूद छात्रों ने तत्काल उसे सरकंडा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शोधार्थी को केमिकल किसने उपलब्ध कराया, वह प्रयोगशाला से बाहर कैसे पहुंचा और संबंधित केमिकल का विभागीय रिकॉर्ड में कितना स्टॉक दर्ज है। नियमानुसार ऐसी घटनाओं के बाद विभाग को तत्काल जांच कर रिपोर्ट कुलपति और कुलसचिव को सौंपनी होती है, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।
मामले के सामने आने के बाद केमेस्ट्री विभाग की तीन प्रयोगशालाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इससे स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्रों की प्रयोगात्मक पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय में शोधार्थियों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विश्वविद्यालय में मनोरोग विभाग और काउंसिलिंग की व्यवस्था होने के बावजूद लगातार छात्रों से जुड़ी गंभीर घटनाएं सामने आने से इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
सीयू के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शोधार्थी के पास केमिकल कैसे पहुंचा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी विश्वविद्यालय से जुड़े एक छात्र की साइनाइड सेवन से मौत हो चुकी है। उस मामले में भी साइनाइड का स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने विश्वविद्यालय परिसर में रसायनों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य समर्थन तंत्र को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
