

बिलासपुर। जिले में बारिश के पानी को संरक्षित कर भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। सैटेलाइट तकनीक और युक्तधारा पोर्टल की मदद से जिले में 350 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है, जहां बारिश का पानी जमीन के भीतर तेजी से रिचार्ज हो सकता है। इन स्थानों पर इंजेक्ट वेल बनाए जाएंगे, जिससे वर्षा जल सीधे भू-गर्भ में पहुंचाया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, चिन्हित 350 स्थानों में से 334 इंजेक्ट वेल के लिए बोर और केसिंग का पूरा खर्च जिले के उद्योग उठाएंगे। एनटीपीसी, राशि पावर, क्लीन कोल, बीईसी फर्टिलाइजर समेत करीब 22 उद्योगों ने इस पहल में सहयोग की जिम्मेदारी ली है। कई स्थानों पर निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है।
अधिकारियों का दावा है कि योजना के पूर्ण होने पर एक वर्ष में लगभग 42 करोड़ लीटर वर्षा जल भू-गर्भ में पहुंचाया जा सकेगा। औसतन प्रत्येक इंजेक्ट वेल से करीब 12 लाख लीटर पानी का रिचार्ज होने की संभावना है। यह मात्रा लगभग 168 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल भरने या 15 लीटर क्षमता की करीब 2.8 करोड़ बाल्टियों के बराबर है।
योजना के तहत पहले छोटे परकुलेशन टैंक और डबरी बनाई जाएंगी, जहां वर्षा जल एकत्र होकर प्राकृतिक रूप से छनने के बाद इंजेक्ट वेल के माध्यम से जमीन के भीतर पहुंचेगा। एक इंजेक्ट वेल में बोर और केसिंग पर लगभग एक लाख रुपये तथा डबरी निर्माण पर करीब दो लाख रुपये का खर्च आता है। डबरी निर्माण का कार्य मनरेगा के माध्यम से कराया जाएगा।
प्रशासन ने बताया कि युक्तधारा पोर्टल से भू-गर्भ में मौजूद फ्रैक्चर जोन की पहचान की गई है। इसके बाद भुवन एप के माध्यम से संबंधित खसरा नंबरों का चयन किया गया। इन्हीं फ्रैक्चर जोन वाली सरकारी जमीनों पर इंजेक्ट वेल स्थापित किए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का अधिकतम भू-जल रिचार्ज सुनिश्चित हो सके।
कलेक्टर द्वारा आयोजित बैठक में उद्योगों से सहयोग की अपील की गई थी, जिसके बाद अनेक कंपनियां इस जल संरक्षण अभियान में सहभागी बनी हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि यह पहल जिले में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और जल संकट कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
