
बिलासपुर। महतारी वंदन योजना का लाभ जारी रखने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद जिले की हजारों महिलाएं तकनीकी समस्याओं से जूझ रही हैं। जिले में करीब 49 हजार महिलाओं का ई-केवाईसी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। किसी के नाम और सरनेम में त्रुटि है तो कई बुजुर्ग महिलाओं के फिंगरप्रिंट मशीन में नहीं आ रहे हैं। इसके चलते महिलाएं बार-बार च्वाइस सेंटरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार जिले में योजना की 4 लाख 90 हजार हितग्राही महिलाओं में से अब तक 4 लाख 41 हजार महिलाओं का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। यह कुल हितग्राहियों का लगभग 90 प्रतिशत है, जबकि शेष 10 प्रतिशत यानी करीब 49 हजार महिलाओं का सत्यापन अभी बाकी है। शासन ने ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की है। तय समय तक सत्यापन नहीं होने पर योजना की अगली किस्त प्रभावित हो सकती है।
योजना के लिए आवेदन भरते समय कई महिलाओं के नाम, सरनेम और पते गलत दर्ज हो गए थे। अब ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान ये त्रुटियां सामने आ रही हैं। सुधार कराने के लिए महिलाएं लगातार च्वाइस सेंटर पहुंच रही हैं, लेकिन कई स्थानों पर सर्वर की समस्या के कारण उनका काम समय पर नहीं हो पा रहा है।
बुजुर्ग महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी बायोमेट्रिक सत्यापन में हो रही है। उम्र बढ़ने के कारण हाथों के निशान हल्के पड़ जाने से फिंगरप्रिंट मशीन उन्हें पहचान नहीं पा रही है। कई मामलों में आंखों की स्कैनिंग भी सफल नहीं हो रही, जिससे पात्र हितग्राहियों का ई-केवाईसी अधूरा रह गया है।
हितग्राही सुनीला बाई ने बताया कि आधार कार्ड में उनका नाम सही दर्ज है, लेकिन योजना के पोर्टल में उनका सरनेम दर्ज नहीं किया गया। नाम सुधार के लिए वे कई बार च्वाइस सेंटर जा चुकी हैं, लेकिन हर बार सर्वर की समस्या बताकर उन्हें लौटा दिया गया। वहीं राजेश्वरी बाई का कहना है कि आवेदन भरते समय ऑपरेटर द्वारा गलत सरनेम दर्ज किए जाने के कारण उनका ई-केवाईसी अटक गया है और योजना की राशि भी नहीं मिल पा रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह ने बताया कि जिले में महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 90 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। शेष महिलाओं का सत्यापन भी 30 जून की समय-सीमा के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी पात्र महिला को योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े।
