
बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर में पदस्थ सब इंजीनियर अमर सिंह चौहान ने बुधवार सुबह महाराणा प्रताप चौक स्थित अपने सरकारी आवास में आत्महत्या कर ली। उन्होंने पहले अपनी कलाई की नस काटी और फिर कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने ट्रांसफर से हुई परेशानी, कुछ अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने और धमकी मिलने का उल्लेख किया है। पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच के साथ उस ईओडब्ल्यू भ्रष्टाचार प्रकरण के पहलू की भी पड़ताल कर रही है, जिसमें पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा आरोपी हैं और अमर सिंह चौहान गवाह बताए जा रहे हैं।
टाइमकीपर पहुंचा तो फंदे पर लटका मिला शव
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9 बजे नगर निगम का टाइमकीपर अमर सिंह चौहान को बुलाने उनके सरकारी क्वार्टर पहुंचा। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर अंदर झांककर देखा तो चौहान का शव फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलने पर सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि फांसी लगाने से पहले उन्होंने अपनी कलाई की नस भी काटी थी। कमरे में खून के निशान मिले हैं। पुलिस ने सुसाइड नोट सहित अन्य साक्ष्य जब्त कर मर्ग कायम करते हुए जांच शुरू कर दी है।
जगदलपुर से बिलासपुर ट्रांसफर के बाद थे तनाव में
मूल रूप से जगदलपुर निवासी अमर सिंह चौहान का अक्टूबर 2025 में बिलासपुर नगर निगम में तबादला हुआ था। करीब नौ महीने बाद उनका पुनः जगदलपुर नगर निगम में स्थानांतरण कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि वे संभागीय कार्यालय जगदलपुर में पदस्थापना चाहते थे और हाल के दिनों में मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।
ईओडब्ल्यू के भ्रष्टाचार मामले से भी जुड़ा था नाम
पुलिस उस भ्रष्टाचार प्रकरण की भी जांच कर रही है, जिसकी जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) कर रही है। इस मामले में नगर निगम के पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा आरोपी हैं और अमर सिंह चौहान को गवाह माना जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, उनसे 30 जून और 6 जुलाई को पूछताछ भी की गई थी। यह मामला जगदलपुर सहित अन्य नगरीय निकायों में निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।
पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी एक कारण को आत्महत्या की वजह मानना उचित नहीं होगा। सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप
पुलिस को मिले सुसाइड नोट में अमर सिंह चौहान ने लिखा कि उनका बिलासपुर ट्रांसफर कराने में मिथिलेश अवस्थी और जयंत सिन्हा का हाथ था, जिसके कारण उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने लिखा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो उनके परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी इन दोनों पर होनी चाहिए।
सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा कि भागीरथ वर्मा और राघवेंद्र तिवारी के बीच किसी लेन-देन की जानकारी उन्हें नहीं है और उन्होंने राघवेंद्र तिवारी से कोई पैसा नहीं लिया। साथ ही आरोप लगाया कि राघवेंद्र तिवारी उन्हें डरा रहे थे।
परिवार के नाम लिखे भावुक संदेश में उन्होंने अपनी पत्नी से माफी मांगते हुए लिखा, “माही मुझे माफ कर देना। मेरे बारे में कोई कुछ भी कहे तो उसकी बात मत सुनना। डरना नहीं। गुनगुन, शुभम और लड्डू का ध्यान रखना। लव यू, मिस यू।” उन्होंने अपने दोनों मोबाइल फोन मंगवाने का भी उल्लेख किया।
दो ज्वाइंट डायरेक्टरों के नाम आने से बढ़ी जांच
पुलिस जांच में सामने आया है कि सुसाइड नोट में जिन मिथिलेश अवस्थी और जयंत सिन्हा का उल्लेख किया गया है, वे दोनों वर्तमान में नगरीय प्रशासन विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। अमर सिंह चौहान के जगदलपुर में पदस्थ रहने के दौरान दोनों अधिकारियों की भी वहां पदस्थापना रही थी।
अब पुलिस ट्रांसफर, कथित प्रताड़ना और सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करेगी। साथ ही ईओडब्ल्यू से जुड़े भ्रष्टाचार मामले और उसमें अमर सिंह चौहान की भूमिका को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच और परिजनों व सहकर्मियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले आत्महत्या के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
