जिले में दो हिट एंड रन हादसे, दो युवकों की मौत, तीन घायल, मस्तूरी और बिल्हा क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों ने बाइक सवारों को मारी टक्कर, चालक फरार

बिलासपुर जिले में हिट एंड रन के दो अलग-अलग मामलों में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग घायल हो गए। दोनों घटनाओं में तेज रफ्तार वाहनों ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी और आरोपी चालक मौके से फरार हो गए। पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहली घटना मस्तूरी थाना क्षेत्र की है। ग्राम भंवतरा निवासी अजीत साहू रविवार सुबह अपने दोस्त हरिशंकर कश्यप के साथ बाइक क्रमांक CG 11 BV 1687 से रायपुर काम पर जाने निकला था। सुबह करीब छह बजे संदीपनी कॉलेज पेंड्री मस्तूरी के पास सामने से आ रही कार क्रमांक CG 10 AW 6537 के चालक ने तेज और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने हरिशंकर कश्यप को मृत घोषित कर दिया। अजीत साहू को कमर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई हैं। घटना के प्रत्यक्षदर्शी शिवम कश्यप और राजू यादव बताए जा रहे हैं। पुलिस आरोपी कार चालक की तलाश कर रही है।

दूसरी घटना बिल्हा थाना क्षेत्र में हुई। ग्राम पत्थरखान निवासी अजय नेताम उर्फ मोनू (25) तिफरा स्थित शराब भट्ठी में काम करता था। रविवार को छुट्टी होने के कारण वह मोबाइल की किस्त जमा करने और घर के दरवाजे के लिए पेंट खरीदने की बात कहकर घर से निकला था। वह अपने साथियों आनंद मरकाम और राधे मरकाम के साथ हिरीं गया था। रात करीब 10.30 बजे निपनिया मेन रोड से लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में अजय नेताम के सिर में गंभीर चोट आई। उसे 112 वाहन से बिल्हा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे में आनंद मरकाम और राधे मरकाम भी घायल हुए हैं। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आठ साल में 142 हिट एंड रन मामले

जिले में हिट एंड रन की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। वर्ष 2018 से 2025 के बीच जिले में हिट एंड रन के 142 मामले दर्ज हुए, जिनमें 158 लोगों की मौत हुई। इनमें से 95 मामलों का खात्मा कर दिया गया, जबकि शेष मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते पीड़ित परिवारों को न तो न्याय मिल पाया और न ही मुआवजा। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में सबसे अधिक 23 घटनाएं दर्ज की गई थीं। पुलिस अब तक अधिकांश मामलों में आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है।

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