चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बड़ी चूक, नाम की समानता के चलते निर्दोष को कर लिया था गिरफ्तार, शुभेंदु अधिकारी के करीबी पीए हत्याकांड में बड़ा खुलासा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बने शुभेंदु अधिकारी के करीबी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है। जांच के दौरान एक जैसे नाम वाले दो लोगों के कारण पुलिस गलत दिशा में चली गई और एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी मानकर गिरफ्तार कर लिया गया।

मामले में अब खुलासा हुआ है कि कोलकाता पुलिस ने जिस व्यक्ति को मुख्य शूटर समझकर गिरफ्तार किया था, वह असली आरोपी नहीं था। जांच में सामने आया कि वास्तविक आरोपी राजकुमार सिंह है, जिसे इलाके में कई लोग राज सिंह के नाम से भी जानते थे। इसी नाम की समानता ने पूरी जांच को भ्रमित कर दिया।

बताया जा रहा है कि 11 मई को कोलकाता पुलिस ने अयोध्या पुलिस की मदद से राज सिंह नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इससे पहले पुलिस बक्सर से विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा को पकड़ चुकी थी। दोनों आरोपियों से पूछताछ में राज सिंह का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसे शूटआउट का अहम आरोपी मान लिया था।

हालांकि पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे जांच एजेंसियों को संदेह हुआ। पुलिस को महसूस हुआ कि गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ मौजूद सबूत और घटनास्थल से मिले इनपुट आपस में मेल नहीं खा रहे हैं।

इसी बीच दो दिन पहले मामले में चौथी गिरफ्तारी हुई। सीबीआई ने बलिया जिले के रसड़ा निवासी राजकुमार सिंह को मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया। इसके बाद जांच की तस्वीर साफ हो गई। सूत्रों के अनुसार राजकुमार सिंह ही इस हत्याकांड का असली शूटर है, जिसे कई लोग राज सिंह के नाम से भी जानते थे।

पकड़े गए आरोपी राजा सिंह की कुछ तस्वीरें भाजपा नेताओं के साथ भी वायरल हुई थी जिसे लेकर विपक्ष मजाक उड़ा रहा था । इतना ही नहीं ऐसे कई सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं जिसमें घटना के समय राजा सिंह अपने घर पर मौजूद था । इसे लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा था और आखिरकार वह सच निकला।

सीबीआई की गहन जांच में यह भी सामने आया कि पहले गिरफ्तार किया गया राज सिंह गलत पहचान का शिकार हुआ था। इसके बाद उसे रिहा कर दिया गया।

इस घटनाक्रम ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इतना हाई प्रोफाइल मामला होने के बावजूद यदि केवल नाम की समानता के आधार पर गलत गिरफ्तारी हो सकती है, तो छोटे मामलों में भी कई निर्दोष लोगों के फंसने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!