सगाई के तीन दिन बाद मंगेतर की हत्या, प्रेम संबंध के चलते रची गई थी साजिश

बेंगलुरु में वर्ष 2003 में सामने आए चर्चित बी. वी. गिरीश हत्याकांड ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। यह हत्याकांड प्रेम संबंध, पारिवारिक दबाव और सुनियोजित साजिश की भयावह कहानी माना जाता है।

जानकारी के अनुसार शुभा शंकरनारायण नाम की 21 वर्षीय कानून की छात्रा का अपने 19 वर्षीय जूनियर अरुण वर्मा के साथ प्रेम संबंध था। लेकिन परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसके बाद शुभा के पिता ने उसकी सगाई 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर बी. वी. गिरीश से तय कर दी।

30 नवंबर 2003 को दोनों की सगाई हुई। परिवार में खुशी का माहौल था और गिरीश अपने भविष्य को लेकर उत्साहित था। लेकिन सगाई के महज तीन दिन बाद ही एक ऐसी साजिश रची गई, जिसने सबकुछ बदल दिया।

बताया गया कि शुभा ने गिरीश को फोन कर शादी से पहले साथ समय बिताने का प्रस्ताव दिया। दोनों डिनर के बाद HAL एयरपोर्ट के पास इनर रिंग रोड स्थित व्यू पॉइंट पहुंचे, जहां वे हवाई जहाजों को उड़ान भरते देख रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तीन लोगों ने मोटरसाइकिल के शॉक एब्जॉर्बर से गिरीश पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल गिरीश की अगले दिन अस्पताल में मौत हो गई।

शुरुआती जांच में पुलिस को कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला। गिरीश का किसी से विवाद नहीं था और सगाई के कुछ दिन बाद ही हुई हत्या के कारण शक भी कम था। लेकिन जांच के दौरान पुलिस ने सगाई का वीडियो देखा, जिसमें शुभा उदास और असहज दिखाई दी।

इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि हत्या वाले दिन शुभा ने अरुण वर्मा को 73 बार फोन किया था और कई संदेश भी भेजे थे। सबूत सामने आने पर शुभा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

जांच में खुलासा हुआ कि हत्या की योजना सगाई से पहले ही बना ली गई थी। शुभा अपने प्रेमी अरुण वर्मा के साथ रहना चाहती थी। इसी कारण उसने अरुण और दो अन्य लोगों के साथ मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रची।

जुलाई 2010 में ट्रायल कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी दोषियों की उम्रकैद कायम रखते हुए कहा कि व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान हिंसा और हत्या नहीं हो सकता।

अदालत ने टिप्पणी की कि शुभा ने अपनी निजी परेशानियों को सुलझाने के लिए अस्वीकार्य और दुखद रास्ता चुना, जिसकी कीमत एक निर्दोष युवक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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