

बिलासपुर। शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए अब बड़े स्तर पर हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है। ‘त्रिनेत्र’ योजना के तहत शहर में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से 1000 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर लागू किया जा रहा है, जिसमें प्रशासन के साथ व्यापारियों और आम नागरिकों की भी भागीदारी रहेगी।
जहां ज्यादा अपराध, वहां पहले कैमरे
योजना के पहले चरण में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां अपराध की घटनाएं अधिक होती हैं। इसमें प्रमुख चौक-चौराहे, बाजार, रिहायशी इलाके और संवेदनशील स्थान शामिल हैं। कैमरे नाइट विजन, वॉइस रिकॉर्डिंग और रडार सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे। इन्हें आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) कंट्रोल कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा, जिससे 24 घंटे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

70% अपराध स्ट्रीट क्राइम, हर माह 450-550 एफआईआर
करीब 137 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और लगभग 7 लाख की आबादी वाले बिलासपुर में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, शहर में होने वाले करीब 70 फीसदी अपराध स्ट्रीट क्राइम की श्रेणी में आते हैं। हर महीने औसतन 450 से 550 एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। इनमें चाकूबाजी, मोबाइल स्नैचिंग और छेड़खानी जैसी घटनाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा वाहन चोरी, सूने मकानों में चोरी और साइबर फ्रॉड भी बड़ी समस्या बने हुए हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और ट्रैफिक पर भी नजर
इस कैमरा नेटवर्क से न केवल अपराधियों की पहचान आसान होगी, बल्कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, नशे में ड्राइविंग और सड़क दुर्घटनाओं पर भी निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन का दावा है कि इससे महिलाओं की सुरक्षा में भी बड़ा सुधार आएगा।
70 वार्डों में कवरेज, गली-गली तक निगरानी
प्रोजेक्ट के तहत शहर के 70 वार्डों की प्रमुख सड़कों, गलियों के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स तक कैमरे लगाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि निगरानी का दायरा शहर के अंतिम हिस्सों तक बढ़ाया जाएगा।
आईटीएमएस में बनेगा नियंत्रण केंद्र, समिति का गठन
मंगलवार को आईटीएमएस तारबाहर में कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में हुई बैठक में इस योजना को लेकर अहम निर्णय लिए गए। कैमरों के संचालन और प्रबंधन के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसका कार्यालय आईटीएमएस में ही रहेगा।
समिति में जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। सांसद और विधायक इसके संरक्षक रहेंगे, जबकि बिलासपुर संभाग के आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक पदेन मुख्य संरक्षक होंगे।
प्रबंध कार्यकारिणी में रामावतार अग्रवाल को अध्यक्ष, नवदीप अरोरा को कार्यकारी अध्यक्ष, सतीश शाह को सचिव, मनीष सखूजा को कोषाध्यक्ष और ललित अग्रवाल को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
राजनांदगांव मॉडल से मिली प्रेरणा
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अपने राजनांदगांव कार्यकाल में इसी तरह की ‘त्रिनेत्र’ योजना लागू की थी। वहां व्यापारियों और जनता के सहयोग से करीब 3 करोड़ रुपए जुटाकर 300 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इस पहल के बाद कुछ ही महीनों में 100 से अधिक अनसुलझे मामलों का खुलासा हुआ था।
देश के अन्य शहरों—हैदराबाद, सूरत और लखनऊ—में भी ऐसे मॉडल सफल रहे हैं, जहां नागरिक सहभागिता से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
4 महीने से चल रही थी तैयारी
त्रिनेत्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष नवदीप सिंह अरोरा के अनुसार, इस योजना की तैयारी पिछले चार महीनों से चल रही थी। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक कैमरों के जरिए शहर की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। कुल लागत 10 करोड़ आंकी गई है, लेकिन व्यापारियों के सहयोग से इसे 7-8 करोड़ तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस हाईटेक पहल से बिलासपुर में अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
