बिलासपुर: बिजली विभाग की बड़ी चूक—नगर निगम को 52 करोड़ का गलत बिल, जांच में 397 कनेक्शनों की बिलिंग फर्जी


बिलासपुर। शहर में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां नगर निगम को 52.73 करोड़ रुपए का अतिरिक्त और गलत बिल थमा दिया गया था। समय रहते जांच होने पर यह गड़बड़ी पकड़ में आई, जिससे निगम को बड़ी आर्थिक राहत मिली। जांच में खुलासा हुआ कि जिन कनेक्शनों के आधार पर बकाया निकाला गया था, उनमें से अधिकांश की बिलिंग पूरी तरह गलत थी।
397 कनेक्शनों की बिलिंग निकली गलत
नगर निगम के जल प्रदाय और स्ट्रीट लाइट से जुड़े कुल 562 कनेक्शनों पर बिजली विभाग ने जनवरी 2026 तक 191.62 करोड़ रुपए का बकाया दर्शाया था। इतनी बड़ी राशि देखकर राज्य शहरी विकास अधिकरण (सूडा) को संदेह हुआ, जिसके बाद 437 संदिग्ध कनेक्शनों की जांच कराई गई।
एनर्जी ऑडिट और स्थल निरीक्षण में पाया गया कि इनमें से 397 कनेक्शनों (करीब 90%) की बिलिंग गलत थी, जबकि केवल 40 कनेक्शन ही सही पाए गए। कई मामलों में बंद पड़े कनेक्शनों और एकलबत्ती मीटरों का भी बिल जारी किया जा रहा था।
52.73 करोड़ का हुआ समायोजन, निगम को राहत
जांच रिपोर्ट के आधार पर बिजली कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 52,73,77,348 रुपए की राशि कम कर दी। इसके बाद नगर निगम का कुल बकाया 191.62 करोड़ से घटकर 138.89 करोड़ रुपए रह गया है। हालांकि यह राशि अब भी निगम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
तीन जोन में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर शहर के प्रमुख जोनों में देखने को मिला—
नेहरू नगर: 67.85 करोड़
गोल बाजार: 64.75 करोड़
सरकंडा: 59.02 करोड़
इन तीनों जोनों में बिलिंग में भारी अंतर पाया गया, जिसे बाद में संशोधित किया गया।
शिकायतों का अंबार, हर महीने 150-200 केस
शहर में करीब 1.51 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। हर महीने 2 से 10 तारीख के बीच बिल जारी किए जाते हैं, इसके बावजूद प्रत्येक जोन में 15 से 20 शिकायतें आती हैं। सातों जोनों को मिलाकर यह संख्या हर माह 150 से 200 तक पहुंच जाती है।
बताया जा रहा है कि स्मार्ट मीटर लगने के शुरुआती दौर में शिकायतें 200-300 तक थीं, जिन्हें बाद में कुछ हद तक कम किया गया, लेकिन समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इतने बड़े पैमाने पर बिलिंग में गड़बड़ी थी, तो विभाग के ऑडिट विंग ने पहले इसे क्यों नहीं पकड़ा? क्या यह महज तकनीकी गलती थी या फिर लापरवाही का बड़ा मामला?
नगर निगम बिजली विभाग के चेयरमैन विजय ताम्रकार ने कहा कि बिल देखकर ही गड़बड़ी का शक हुआ था, जिसके बाद एनर्जी ऑडिट कराया गया और सच्चाई सामने आई। वहीं अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही 52 करोड़ की राशि कम की गई है।
अब भी 138 करोड़ का बकाया चुनौती
भले ही निगम को 52 करोड़ रुपए की राहत मिल गई हो, लेकिन अब भी 138.89 करोड़ रुपए का बकाया बाकी है। बिजली विभाग ने संशोधित राशि जल्द जमा करने के लिए पत्र भी जारी कर दिया है। ऐसे में नगर निगम के लिए इस भारी भरकम भुगतान की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
यह मामला न सिर्फ एक तकनीकी त्रुटि, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!