

बिलासपुर |
बिलासपुर। शनिवार दोपहर करीब 1.05 बजे सिम्स के सेकेंड फ्लोर में आग लगने की सूचना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही डॉक्टर, स्टाफ और सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हुए और दमकल विभाग को सूचना दी गई। हालांकि शहर के ट्रैफिक और परिसर में बेतरतीब पार्किंग के कारण फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने में करीब 10 मिनट का समय लग गया।
इस बीच अस्पताल के स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए फायर सिस्टम के जरिए आग पर काबू पा लिया। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह पूरी घटना मॉक ड्रिल का हिस्सा थी, जिसे जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन द्वारा आपातकालीन तैयारियों को परखने के लिए आयोजित किया गया था।
सीमित अधिकारियों को ही थी जानकारी
मॉक ड्रिल की जानकारी केवल कलेक्टर और सिम्स के डीन तक सीमित रखी गई थी। यहां तक कि अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह भी इससे अनजान थे। सेकेंड फ्लोर की कूलर टंकी में नियंत्रित तरीके से आग लगाकर अभ्यास किया गया।
डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर यह मॉक ड्रिल की गई थी। आग की सूचना मिलते ही सभी विभाग सतर्क हो गए और आंतरिक व्यवस्था प्रभावी रही।
जाम और पार्किंग बनी बड़ी चुनौती
मॉक ड्रिल में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक और अव्यवस्थित पार्किंग के रूप में सामने आई। अस्पताल के बाहर और परिसर में खड़े वाहनों के कारण दमकल वाहन की रफ्तार प्रभावित हुई। रास्ते में जाम लगने से रिस्पॉन्स टाइम बढ़ गया। इस दौरान एक स्कूटी सवार युवती बाल-बाल बची, वहीं परिसर में वाहन बैक करते समय हल्की टक्कर और विवाद की स्थिति भी बनी।
अस्पताल में अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था
सिम्स में एबीसी और सीओ₂ गैस आधारित कुल 664 अग्निशमन यंत्र विभिन्न वार्डों, ओपीडी, इमरजेंसी यूनिट और संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए हैं। मॉक ड्रिल के बाद एनआईसीयू और पीआईसीयू जैसे अति संवेदनशील विभागों में विशेष सतर्कता बरती गई और फायर अलार्म व स्मोक डिटेक्टर की कार्यशीलता की जांच की गई।
ट्रैफिक सुधार के बिना अधूरी तैयारी
मॉक ड्रिल ने यह साफ कर दिया कि आपात स्थिति में केवल अस्पताल की आंतरिक तैयारी पर्याप्त नहीं है। बाहरी ट्रैफिक व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिम्स और आसपास के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए अलग ट्रैफिक प्लान और फायर हाइड्रेंट जैसी सुविधाओं की आवश्यकता है।
इस अभ्यास ने जहां अस्पताल की तत्परता को साबित किया, वहीं शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत को भी उजागर कर दिया।
