
बिलासपुर
बिलासपुर। नगर निगम के तारबाहर वार्ड क्रमांक 29 में होने वाला उपचुनाव इस बार पूरी तरह मतदाता सूची के अंतिम आंकड़ों पर निर्भर नजर आ रहा है। पूर्व पार्षद शेख असलम के निधन से रिक्त हुई इस सीट पर कब्जे के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दोनों ही दल 13 अप्रैल को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची का इंतजार कर रहे हैं, जिसके आधार पर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार वार्ड में वर्तमान में लगभग 4800 मतदाता दर्ज हैं, लेकिन विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) के चलते इस संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। यही कारण है कि प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी तक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है और संभावित सामाजिक व जातीय समीकरणों का आकलन करने में जुटे हैं।
तारबाहर वार्ड परंपरागत रूप से मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता रहा है, जो कांग्रेस के पक्ष में मजबूत वोट बैंक के रूप में देखा जाता है। हालांकि, इस बार भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए हिंदू और ईसाई मतदाताओं को एकजुट करने पर विशेष जोर देना शुरू कर दिया है। ईसाई बहुल इलाकों में पार्टी नेताओं की बढ़ती सक्रियता को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जैसे-जैसे मतदाता सूची जारी होने की तिथि नजदीक आ रही है, वार्ड में चुनावी हलचल तेज होती जा रही है। तारबाहर मुख्य मार्ग, नाऊपारा और रेलवे कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में चाय दुकानों और चौपालों पर राजनीतिक चर्चाएं गर्म हैं। संभावित दावेदार भी सक्रिय हो चुके हैं और मतदाताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं।
मतदाता सूची के बाद तय होगी सामाजिक हिस्सेदारी
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद विभिन्न समाजों की हिस्सेदारी स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद दोनों प्रमुख दलों द्वारा वरिष्ठ नेताओं के दौरे और समाज प्रमुखों के साथ बैठकों का दौर शुरू होने की संभावना है। कांग्रेस जहां अपने पारंपरिक मतदाताओं को बनाए रखने पर फोकस कर रही है, वहीं भाजपा नए सामाजिक समीकरणों के सहारे मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बनाने की तैयारी में है।
स्थानीय मुद्दे भी रहेंगे निर्णायक
चुनाव में स्थानीय समस्याएं भी अहम भूमिका निभाएंगी। डीपूपारा तालाब की बदहाल स्थिति, सौंदर्याकरण के बावजूद गंदगी, बंद पड़े फव्वारे और लाइटें लोगों की नाराजगी का कारण बनी हुई हैं। लगभग एक हजार घरों का सीवरेज सीधे तालाब में गिरने से प्रदूषण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, वहीं भूजल के दूषित होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इसके अलावा वार्ड में सामुदायिक भवन की कमी भी एक प्रमुख मुद्दा है।
ऐसे में स्पष्ट है कि इस उपचुनाव में जहां एक ओर सामाजिक और धार्मिक समीकरण अहम होंगे, वहीं स्थानीय समस्याओं पर प्रत्याशियों की जवाबदेही भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
