परशुराम जयंती पर 4 दिवसीय आयोजन, पूजा-आरती के साथ रक्तदान शिविर भी होगा20 व 21 अप्रैल को दो स्थानों से निकलेगी भव्य शोभायात्रा


बिलासपुर |
बिलासपुर। भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर इस वर्ष शहर में चार दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा तय करने के लिए शनिवार को महामाया चौक स्थित संस्कार भवन में ब्राह्मण समाज की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि अक्षय तृतीया के दिन 20 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी। इस बार सरकंडा क्षेत्र से भी शोभायात्रा निकालने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम के तहत राजकिशोर नगर स्थित परशुराम प्रतिमा पर पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसके बाद दोपहर 3 बजे ध्वज के साथ बाइक रैली निकाली जाएगी। यह रैली अशोक नगर चौक पहुंचकर भव्य शोभायात्रा का रूप लेगी।


बैठक की अध्यक्षता पंडित हरिशंकर दुबे ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. विनय पाठक, डॉ. राघवेंद्र दुबे और पं. गणेश शास्त्री मौजूद रहे। संचालन अमित तिवारी ने किया। आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां भी पदाधिकारियों को सौंपी गईं।
चार दिनों तक होंगे विविध आयोजन
कान्यकुब्ज ब्राह्मण विकास मंच छत्तीसगढ़ की बैठक में भी जयंती कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तय की गई। मंच के प्रदेश संगठन सचिव पं. सुदेश दुबे ‘साथी’ ने बताया कि 18 अप्रैल को लोखंडी स्थित आशीर्वाद भवन में पूजा-अर्चना और सम्मान समारोह होगा। 19 अप्रैल को आनंदा इंपीरियल होटल में सुबह 10 बजे से रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा।
इसके बाद 20 अप्रैल को इमलीपारा भवन में पूजा और आरती होगी, जबकि 21 अप्रैल को दयालबंद शीतला मंदिर से शोभायात्रा निकाली जाएगी।
आकर्षक झांकियों के साथ निकलेगी शोभायात्रा
आयोजन के तहत राजकिशोर नगर से शुरू होकर अशोक नगर होते हुए शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें भगवान परशुराम की जीवंत झांकियां, बैंड-बाजे, धार्मिक ध्वज और पारंपरिक वेशभूषा विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। शोभायात्रा नूतन चौक, सीपत चौक होते हुए रामसेतु चौक स्थित शीतला मंदिर पहुंचेगी, जहां पूजा-अर्चना और ध्वज अर्पण किया जाएगा।
इसके पश्चात सत्संग और प्रसाद वितरण का आयोजन होगा। आयोजन को भव्य एवं अनुशासित बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है।
बैठक में उपस्थित समाजजनों ने एकजुट होकर आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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