जरहाभाठा में जमीन घोटाला: 3 डिसमिल खरीदी, दस्तावेजों में हेरफेर कर 6 डिसमिल बेच दी

शशि मिश्रा


बिलासपुर। शहर के पॉश इलाके जरहाभाठा स्थित ओमनगर में जमीन से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। एक कारोबारी पर आरोप है कि उसने राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से तीन डिसमिल जमीन खरीदकर दस्तावेजों में हेरफेर किया और उसी जमीन को दो अलग-अलग लोगों को मिलाकर छह डिसमिल के रूप में बेच दिया। मामले में सिविल लाइन थाने में शिकायत की गई है और आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, किशोर बूट हाउस के संचालक किशोर दयालानी ने वर्ष 2009 में ओमनगर निवासी लोईस हीराधर से 3 डिसमिल (करीब 1295 वर्गफीट) जमीन खरीदी थी। रजिस्ट्री दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से तीन डिसमिल का ही उल्लेख है। इसके बावजूद वर्ष 2011 में दयालानी ने रश्मि मोटवानी और अनिल मोटवानी को 20 फीट चौड़ा और 70 फीट गहरा, लगभग 1400-1400 वर्गफीट के दो प्लॉट बेच दिए, जो कुल मिलाकर छह डिसमिल से अधिक क्षेत्रफल दर्शाते हैं।
बताया जा रहा है कि मौके पर दयालानी के नाम अतिरिक्त जमीन उपलब्ध नहीं थी। जब दूसरे खरीदारों ने दस्तावेजों की जांच कराई, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। आरोप है कि जमीन खरीदने के बाद दयालानी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर खसरा रिकॉर्ड में ओवरराइटिंग कर जमीन का रकबा बढ़ा लिया और आसपास की सरकारी जमीन को भी अपने नाम दर्ज कराकर उसकी रजिस्ट्री कर दी।
दोनों प्लॉट पर बन चुके हैं मकान
जिन दो प्लॉटों की बिक्री की गई, उन पर खरीदारों द्वारा दो मंजिला मकान भी बना लिया गया है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
टैक्स बचाने के लिए कच्चे-पक्के में लेनदेन
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमीन की खरीदी-बिक्री में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की गई। दयालानी ने जमीन 400 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से खरीदी, लेकिन रजिस्ट्री में 200 रुपए प्रति वर्गफीट ही दर्शाया गया और शेष राशि नकद (कच्चे) में दी गई। इसी तरह बिक्री के दौरान जमीन 1000 रुपए प्रति वर्गफीट में बेची गई, लेकिन दस्तावेजों में केवल 300 रुपए प्रति वर्गफीट ही दर्ज किया गया। बाकी राशि नकद में ली गई।
राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
खसरा और बी-2 जैसे सरकारी दस्तावेजों में बिना राजस्व अधिकारियों की संलिप्तता के इस तरह का बदलाव संभव नहीं माना जा रहा है। आरोप है कि पटवारी और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से ही रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन का रकबा बढ़ाया गया।
दो माह से लंबित है शिकायत
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पूरे मामले की शिकायत करीब दो महीने पहले ही कर दी गई थी, लेकिन अब तक पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। सिविल लाइन पुलिस का कहना है कि तहसीलदार से जानकारी नहीं मिलने के कारण कार्रवाई लंबित है।
पीड़ितों ने मामले में तत्काल अपराध दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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