बिलासपुर में मल्टीलेवल पार्किंग में अवैध ऑटो डीलिंग का खुलासा, 500 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी

शशि मिश्रा

फ़ोटो साभार


बिलासपुर में कलेक्टर और एसएसपी कार्यालय के समीप स्थित मल्टीलेवल पार्किंग में अवैध ऑटो डीलिंग का बड़ा मामला सामने आया है। पार्किंग स्थल, जिसे केवल वाहन खड़ा करने के उद्देश्य से बनाया गया था, वहां खुलेआम सेकेंड हैंड गाड़ियों की खरीदी-बिक्री का धंधा संचालित किया जा रहा है। यहां 500 से अधिक दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े कर यार्ड बना लिया गया है।
बेसमेंट और पहले फ्लोर पर कब्जा, यहीं हो रहा सौदा
जानकारी के अनुसार, साई ऑटो डील नामक संचालक ने पार्किंग के बेसमेंट और पहले फ्लोर को कब्जे में लेकर वाहन यार्ड में तब्दील कर दिया है। यहां बाकायदा ग्राहकों से सौदेबाजी की जा रही है। मौके पर फोटो खींचने पर रोक है और ग्राहकों को व्हाट्सएप के जरिए गाड़ियों की तस्वीरें व जानकारी भेजी जा रही है।


स्ट्रिंग ऑपरेशन में हुआ खुलासा
मामले का खुलासा एक स्थानीय अखबार के रिपोर्टर द्वारा किए गए स्ट्रिंग ऑपरेशन में हुआ। हालांकि मौके पर फोटो लेने की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन बाद में गाड़ियों की जानकारी व्हाट्सएप पर साझा की गई, जिससे अवैध कारोबार की पुष्टि हुई।
दूसरा डीलिंग पॉइंट भी सक्रिय
बताया जा रहा है कि मंगला क्षेत्र स्थित अंजनी टॉवर के बेसमेंट में भी साई ऑटो डील का दूसरा डीलिंग पॉइंट संचालित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कारोबार का संचालन आलोक गोस्वामी द्वारा किया जा रहा है और उसके साथ कई युवक जुड़े हैं। बिना किसी होर्डिंग या विज्ञापन के यह पूरा कारोबार गुपचुप तरीके से चल रहा है।
बिना लाइसेंस चल रहा सेकेंड हैंड वाहन कारोबार
आरटीओ अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में ट्रेड लाइसेंस और उसके नवीनीकरण पर फिलहाल रोक है, क्योंकि वर्ष 2023 में ऑटो डीलर्स एसोसिएशन द्वारा बैंक गारंटी बढ़ाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। ऐसे में शहर में सेकेंड हैंड वाहनों की खरीदी-बिक्री बिना वैध लाइसेंस के ही की जा रही है। अधिकांश डीलर्स के पास आवश्यक दस्तावेज जैसे ट्रेड लाइसेंस, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और नगर निगम की अनुमति भी नहीं है।
पार्किंग की जगह सड़क पर खड़े हो रहे वाहन, बढ़ रहा जाम
विडंबना यह है कि जिस मल्टीलेवल पार्किंग को शहर में यातायात दबाव कम करने के लिए बनाया गया था, वहां अवैध कब्जे के कारण लोग अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी कर रहे हैं, जिससे पीक समय में जाम की स्थिति बन रही है।
प्रशासन की लापरवाही उजागर
स्मार्ट सिटी द्वारा इस पार्किंग का ठेका पांच साल के लिए दिया गया था, लेकिन इसके बाद कभी नियमित जांच नहीं की गई। वहीं अंजनी टॉवर के बेसमेंट, जो पार्किंग के लिए आरक्षित है, वहां भी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिसकी निगरानी नहीं हो रही।
कार्रवाई के दावे, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं
मामला सामने आने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। रविवार को अवकाश होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने कहा है कि कार्यालय खुलने पर जांच कराकर संबंधितों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
वहीं पार्किंग ठेकेदार राजन जायसवाल ने कहा कि पार्किंग का उपयोग केवल वाहन खड़े करने के लिए ही अनुमत है, किसी भी तरह के व्यवसायिक उपयोग की अनुमति नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सवाल यह है कि शहर के सबसे संवेदनशील प्रशासनिक क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार कैसे संचालित होता रहा और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं

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