
शशि मिश्रा
बिलासपुर शहर आज फिर से NEET/JEE परीक्षाओं के मानसिक दबाव से बड़ी मुश्किल से एक बच्चे का जीवन को सुरक्षित कर पाए हैं। जो बिलासपुर के जिम्मेदार नागरिकों के कारण हो पाया है। उस बच्चे ने नीट की कुंजी से अपने नंबर मिलाये और घर से बिना मोबाइल, पैसे एवं आईडी कार्ड के घर से एक कागज की पर्ची लिखकर निकल गया। घर से खाली हाथ निकालना एक अनहोनी की तरफ इशारा करता है।
बच्चों की मां ने तुरंत अपने पिताजी को बताया और उनके पिताजी ने खुद से संबंधित पूर्व सैनिक महासभा के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा जी को इस घटना की सूचना दी। उन्होंने यह जानकारी तुरंत ऑटो संघ के ग्रुप में, सभी सामाजिक संगठनों के ग्रुपों में और सभी संगठनों तक पहुंचाई। इस सजकता से जिस ऑटो में वह बच्चा रेलवे स्टेशन तक गया था उन्होंने रेलवे के कुछ लोगों को बताया और संदिग्ध अवस्था में बच्चा प्लेटफार्म नंबर 4 के आखिरी छोर पर पटरीयों के पास बैठा हुआ पाया गया। सूचना जो लगभग पूरे बिलासपुर में 1 घंटे में ही प्रसारित हो गई थी। जो जिम्मेदार नागरिकों और कर्मठ संगठनों से परावर्तित होकर तुरंत राणा जी तक पहुंच गई और बच्चे को तुरंत उसे जगह से सुरक्षित प्राप्त कर लिया गया। इसके पश्चात पूर्व सैनिक संगठन, “सिपाही” एवं पूर्व सैनिक महासभा की ओर से सभी सामाजिक संगठनों, ऑटो संघ एवं रेलवे के कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। और बच्चे को सुरक्षित उनके माता-पिता तक पहुंचाया गया।
ऐसी ही एक घटना एक साल पहले एक आवासीय कॉलेज के छात्र के साथ हुई थी और वह बच्चा भी जो कॉलेज में द्वितीय वर्ष का छात्र था। परिवार के मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या करने रतनपुर के लखनी देवी मंदिर के जंगलों में चला गया था। जिसे महेंद्र प्रताप सिंह राणा जी, उनकी टीम और एनसीसी के कुछ बच्चों ने मिलकर पूरी रात जंगल में खोजबीन करके सुबह 4:00 बजे पुनः प्राप्त किया था और उनके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाया था।
सभी सामाजिक संगठन जो देश है और समाज क्षेत्र में ऐसा कार्य करते हैं। उन सब का दिल से साधुवाद है ।
और साथ में माता-पिता को एक सख्त समझाइए और विनम्र निवेदन है की अपनी महत्वाकांक्षाओं का बोझ अपने बच्चों पर ना डालें , उनका मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित न करें कि वह इस दुनिया से विरक्त हो जाए। ऐसी ही एक घटना को पिछले साल बिलासपुर शहर में अपने सीने में झेला है। जिसमें एक ऐसे ही विद्यार्थी ने परीक्षा के दबाव के कारण खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। और माता-पिता के हाथ सिर्फ रोने की सिवा कुछ नहीं बचा था। पुनः सभी सामाजिक राष्ट्रवादी संगठनों को धन्यवाद है। माता-पिता को अपने बच्चों के साथ मित्रता करने एवं उनकी कठिनाइयों में उनका सहारा बनने का करबद्ध निवेदन है और अपनी महत्वाकांक्षाओं अपने बच्चों पर थोपना बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
