

रायगढ़। रायगढ़ पुलिस ने करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी एक महिला एनजीओ कार्यकर्ता को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड दिलाने का झांसा देकर उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों के लेनदेन के लिए कर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला के खाते से करीब 2.17 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन किया गया और देशभर में 44 साइबर फ्रॉड शिकायतों में इस खाते का उल्लेख मिला है।
पुलिस के अनुसार इंदिरानगर रायगढ़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आयशा परवीन ने 12 मार्च को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि दिसंबर 2025 में उसके भांजे के माध्यम से उसकी पहचान अभय यादव और विजय चंद्रा से हुई थी। विजय चंद्रा ने उसे बताया कि एक कंपनी CSR मद से सामाजिक कार्यों के लिए अनुदान देना चाहती है। आरोपियों ने संस्था से जुड़े दस्तावेज लेकर महिला के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया पूरी कर ली।
इसके बाद आरोपियों ने महिला और उसके पति को नौकरी और अनुदान दिलाने के बहाने गुवाहाटी बुलाया। वहां होटल में ठहराने के बाद गैंग के सदस्यों ने महिला के मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड कराकर बैंक खाते की एक्सेस ले ली। करीब एक सप्ताह तक महिला को वहीं रोककर उसके खाते से लगातार ट्रांजेक्शन किए गए और 12 जनवरी 2026 को उसे वापस भेज दिया गया।
रायगढ़ लौटने के बाद बैंक से संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलने पर महिला को ठगी का शक हुआ। बाद में देश के विभिन्न राज्यों से मेल प्राप्त हुए, जिनमें उसके खाते में साइबर फ्रॉड से संबंधित रकम जमा होने की जानकारी दी गई। जांच में पता चला कि 29 दिसंबर 2025 से ही उसके खाते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन शुरू हो गए थे।
महिला की शिकायत पर साइबर थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 03/2026 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी से जुड़े मितेश सोनी, विजय चंद्रा, अजय साहू, अभय यादव और सचिन चौहान को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से साइबर फ्रॉड गैंग से जुड़े थे और विभिन्न राज्यों में सक्रिय गिरोहों को कॉरपोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था। इसके बदले उन्हें 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। आरोपियों ने पूछताछ में 25 से 30 बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात भी स्वीकार की है।
आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप जब्त किया गया है। प्रारंभिक जांच में साइबर पुलिस के समन्वय पोर्टल पर पीड़िता के खाते से जुड़े 44 अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों की जानकारी सामने आई है, जिनमें करोड़ों रुपये के विवादित ट्रांजेक्शन दर्ज हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि जिले में साइबर थाना खुलने के बाद साइबर अपराधों की जांच में तेजी आई है और ऐसे गिरोहों के नेटवर्क का लगातार पर्दाफाश किया जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या लालच भरे ऑफर से सावधान रहें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
