
शशि मिश्रा

बिलासपुर। शहर में बिजली के खंभों पर अवैध रूप से लगाए गए इंटरनेट और टीवी के केबलों को हटाने की तैयारी बिजली विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि इन अव्यवस्थित केबलों के कारण बिजली लाइनों में फॉल्ट की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं और मरम्मत कार्य के दौरान कर्मचारियों को भी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए अब स्थानीय केबल ऑपरेटरों को नोटिस जारी कर पूरे शहर में सर्वे कर अवैध केबल हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर के अधिकांश इलाकों में स्थानीय केबल ऑपरेटरों ने बिना किसी तकनीकी मानक या अनुमति के बिजली के खंभों पर केबल बिछा दिए हैं। कई स्थानों पर इन केबलों को बिजली लाइनों के साथ ही बांध दिया गया है, जिससे तारों के उलझने और फॉल्ट होने की स्थिति बन जाती है। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है।

मरम्मत कार्य में हो रही भारी परेशानी
विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जब भी किसी क्षेत्र में बिजली लाइन में खराबी आती है और मरम्मत करनी पड़ती है, तब खंभों पर लटकते इन केबलों के कारण काम करना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार केबलों के जाल के कारण बिजली तारों तक पहुंचना भी कठिन हो जाता है। इससे मरम्मत कार्य में देरी होती है और उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती झेलनी पड़ती है।
51 हजार पोल पर बेतरतीब केबल
बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के करीब 51 हजार बिजली पोल पर निजी कंपनियों और स्थानीय ऑपरेटरों के केबल लगे हुए हैं। विभाग एक पोल के बदले सालभर का मात्र 100 रुपए किराया वसूल करता है। दो बड़ी कंपनियां विभाग को नियमित किराया देती हैं, लेकिन स्थानीय केबल ऑपरेटरों द्वारा अधिकांश मामलों में कोई शुल्क नहीं दिया जाता।

इन दो कंपनियों में से एक के केबल करीब 27 हजार पोल पर लगे हैं, जिससे विभाग को 27 लाख रुपए सालाना आय होती है। वहीं दूसरी कंपनी के 24 हजार पोल पर केबल लगे हैं, जिससे 24 लाख रुपए की आय होती है। इस तरह विभाग को इन दोनों कंपनियों से कुल 51 लाख रुपए सालाना राजस्व प्राप्त होता है। दूसरी ओर स्थानीय ऑपरेटरों की संख्या भी लगभग इतनी ही बताई जा रही है, लेकिन उनसे कोई भुगतान नहीं लिया जाता।
सुरक्षा मानकों की हो रही अनदेखी
बिना किसी तकनीकी मानक के खींचे गए केबल कई जगहों पर सड़क के काफी करीब आ गए हैं। कम ऊंचाई के कारण भारी वाहनों के इनमें फंसने का खतरा बना रहता है, वहीं दोपहिया वाहन चालक भी कई बार लटकते तारों की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
नियमों के मुताबिक जमीन से 3 से 4 मीटर की ऊंचाई तक पोल पर कोई भी खुला तार नहीं होना चाहिए। इस हिस्से में केबल को जीआई या पीवीसी पाइप से कवर कर इंसुलेटर पर फिक्स करना अनिवार्य है, लेकिन शहर के कई इलाकों में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
कई क्षेत्रों में केबलों का जाल
करोना चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, सिविल लाइन और बृहस्पति बाजार जैसे प्रमुख इलाकों में बिजली पोलों पर केबलों का जाल साफ देखा जा सकता है। कई जगहों पर तार मकड़ी के जाले की तरह उलझे हुए हैं। आंधी-तूफान या तेज बारिश के दौरान यही तार बिजली लाइनों में फॉल्ट का बड़ा कारण बनते हैं।
योजनाएं फाइलों में, काम अधूरा
बिजली विभाग पिछले कई वर्षों से तारों को व्यवस्थित करने और जर्जर तारों को हटाकर सुरक्षित एबी केबल लगाने की योजना बना रहा है। हालांकि पिछले तीन साल से चल रही यह योजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। विभाग ने पोल से पोल तक केबल व्यवस्थित करने का भी प्लान बनाया था, लेकिन वह भी अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाया है।
जल्द जारी होंगे नोटिस
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता पी. श्रीनिवास राजू ने बताया कि शहर में बिजली पोलों पर लगे अवैध केबलों की जल्द जांच कराई जाएगी। इसके लिए स्थानीय केबल ऑपरेटरों को नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद सभी जोन के अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबलों को हटाया जाए और जहां जरूरत होगी वहां केबल बदले भी जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बिजली पोलों पर कम ऊंचाई पर लटक रहे केबलों को भी हटाने या व्यवस्थित करने की कार्रवाई की जाएगी ताकि बिजली व्यवस्था सुचारु रहे और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
