

बिलासपुर। कोटा थाना क्षेत्र के फ़िरंगीपारा में हुए घटनाक्रम को लेकर प्रकाशित कुछ समाचारों को पुलिस ने भ्रामक और आधारहीन बताया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि पुलिस पार्षद की सूचना पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पहुंची थी।

पुलिस के अनुसार 4 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 3 से 4 बजे के बीच वार्ड क्रमांक 21 फ़िरंगीपारा के पार्षद भागवत साहू ने मोबाइल के माध्यम से सूचना दी थी कि फ़िरंगीपारा नाका चौक स्थित पानी टंकी के पास तथा देवरियापारा इलाके में कुछ युवक कपड़े उतारकर गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं तथा मोहल्ले में गुंडागर्दी कर दहशत फैला रहे हैं, जिससे आम लोग परेशान हो रहे हैं।
सूचना मिलते ही पेट्रोलिंग पार्टी क्रमांक-04 और थाना कोटा की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और पार्षद भागवत साहू से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस ने असामाजिक तत्वों को वहां से खदेड़ते हुए मोहल्ले में शांति व्यवस्था बहाल कराई।

बताया गया कि पुलिस टीम के पहुंचने से पहले फ़िरंगीपारा में पियूष किराना दुकान के पास कुछ युवकों की भीड़ गाली-गलौज और हंगामा कर रही थी। पार्षद भागवत साहू ने पहले उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं मानने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी।

पुलिस का कहना है कि इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा अपने बचाव में घटना का वीडियो और समाचार इस तरह प्रसारित किया गया, जिससे पुलिस की कार्रवाई को विवादास्पद बनाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार यह प्रयास न केवल अनुचित बल्कि अवैधानिक भी है।
मामले में प्रकाशित भ्रामक समाचारों को लेकर एसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने भी आपत्ति जताते हुए इसका खंडन किया है। वहीं वार्ड पार्षद भागवत साहू ने भी वीडियो जारी कर स्पष्ट किया है कि समाचार मिथ्या और आधारहीन है तथा पुलिस उनकी सूचना पर ही कार्रवाई करने मौके पर पहुंची थी।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों ने मोहल्ले में हुड़दंग मचाया, उन्हें कुछ खबरों में निरीह और पीड़ित नागरिक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। होली जैसे त्योहार के दौरान भी पुलिसकर्मी ड्यूटी पर रहकर शांति व्यवस्था बनाए रखने का काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें अनावश्यक रूप से कटघरे में खड़ा करना निंदनीय है।
पुलिस ने अपील की है कि किसी भी घटना से संबंधित समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य की जाए, ताकि भ्रामक जानकारी फैलने से बचा जा सके।
