

छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को ऐन वक्त पर रोके जाने पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव केवल इनपुट, अफवाह या आशंका के आधार पर नहीं टाले जा सकते। चुनाव स्थगित करने के लिए ठोस और प्रमाणित कारण होना अनिवार्य है।
हाई कोर्ट ने इस मामले में 12 जनवरी को अगली सुनवाई तय करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि बीसीआई को यह स्पष्ट करना होगा कि चुनाव रोकने के पीछे उसके पास क्या ठोस आधार और प्रमाण थे।
तीन दिन पहले रोका गया चुनाव
छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के पदाधिकारियों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए प्रदेश के प्रतिनिधि का चुनाव 9 जनवरी को प्रस्तावित था। लेकिन चुनाव से ठीक तीन दिन पहले 6 जनवरी को बीसीआई के चेयरमैन ने आदेश जारी कर चुनाव पर रोक लगा दी। आदेश में चुनाव के दौरान सदस्यों को लग्जरी कारें और पैसे देने जैसी अफवाहों का हवाला दिया गया था।
बीसीआई के इस आदेश को चुनौती देते हुए बीपी सिंह, जे.के. त्रिपाठी, अशोक तिवारी, फैजल रिजवी, संतोष वर्मा, चंद्रप्रकाश जांगड़े सहित कुल 19 चुने गए सदस्यों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
हाई कोर्ट ने पूछा—सबूत कहां हैं?
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बीसीआई के आदेश को अस्पष्ट बताते हुए सवाल उठाया कि चुनाव में अनियमितताओं के ठोस सबूत कहां हैं। कोर्ट ने कहा कि आदेश में किसी भी विशेष घटना या प्रमाण का उल्लेख नहीं है।
बेंच ने टिप्पणी की कि वैधानिक संस्थाओं के चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। चुनाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन केवल अपुष्ट जानकारी या आशंका के आधार पर उन्हें रोकना न्यायसंगत नहीं है।
बीसीआई ने जताई हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से दलील दी गई कि चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग यानी सदस्यों की खरीद-फरोख्त की आशंका थी, इसी कारण चुनाव रोके गए। बीसीआई ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है, जिसे 10 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।
पहले भी करना पड़ा था न्यायिक हस्तक्षेप
हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय तक स्टेट बार काउंसिल का कामकाज ठप पड़ा था। फरवरी 2025 में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप और सख्त निर्देशों के बाद ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो सकी थी। ऐसे में चुनाव को दोबारा टालना वकीलों के हितों के खिलाफ है।
मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी, जिसमें बीसीआई को अपने आदेश का ठोस आधार अदालत के सामने रखना होगा।
