

बिलासपुर।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कथाकार मनोज रुपड़ा के अपमान को लेकर शहर सहित पूरे प्रदेश के साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों और प्रबुद्ध नागरिकों में भारी आक्रोश है। इस मामले में कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को तत्काल पद से हटाने की मांग तेज हो गई है। शुक्रवार को साहित्यकारों और नागरिक संगठनों ने कुलाधिपति एवं राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। वहीं, एनएसयूआई ने कुलपति का पुतला दहन कर जांच और कार्रवाई की मांग की।
कार्यक्रम में हुआ विवाद
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग द्वारा 7 जनवरी को एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया था। विषय था— “समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ”। आरोप है कि कुलपति प्रो. चक्रवाल विषय पर बोलने के बजाय अपनी कहानी सुनाने लगे और स्वयं ही वरिष्ठ कथाकार मनोज रुपड़ा से यह पूछ लिया कि “भाई साहब, आप बोर तो नहीं हो रहे हैं?”
इस पर कथाकार रुपड़ा ने विषय पर चर्चा करने की बात कही, जिससे नाराज होकर कुलपति ने उन्हें कार्यक्रम से बाहर निकलवा दिया। इस घटना के बाद देशभर के साहित्यकारों ने सोशल मीडिया पर कड़ी निंदा शुरू कर दी।
ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन
शुक्रवार को वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवारी, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, राजेश्वर सक्सेना, कपूर वासनिक, मुदित मिश्र सहित समाज के नंद कश्यप, राजकुमार अग्रवाल, मधुकर गोरख और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने अतिरिक्त कलेक्टर एस.एन. दुबे को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में अतिथि का अपमान अस्वीकार्य है और इससे बिलासपुर की छवि धूमिल हुई है। उन्होंने राष्ट्रपति से ऐसे कुलपति को तत्काल बर्खास्त करने की अनुशंसा करने की मांग की।
इसी तरह नागरिक मंच के डॉ. राजीव अवस्थी, संजय पांडेय और मुनीव शुक्ला ने एडीएम शिवकुमार बनर्जी को ज्ञापन सौंपकर कुलपति के आचरण की निंदा की और उन्हें पद से हटाने की मांग की।
बेटी बोली—पूरे साहित्य जगत का अपमान
कथाकार मनोज रुपड़ा की बेटी आयुषी रुपड़ा ने कहा कि कुलपति के व्यवहार से पूरे साहित्य जगत का अपमान हुआ है। “पापा ने विषय पर बोलने की बात कही तो कुलपति का अहंकार आहत हो गया और उन्होंने उन्हें बाहर निकलने को कहा। जब अतिथि के साथ ऐसा व्यवहार है तो सोचिए, वे अपने प्राध्यापकों और छात्रों से कैसा व्यवहार करते होंगे।”
राजनीतिक संगठनों की भी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता प्रमोद नायक और प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि कुलपति को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति का पुतला दहन किया। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष लक्की मिश्रा, सुमित सूर्यवंशी, ऋषि पटेल, फरहान खान, कुणाल मेड़े, आदित्य भोई सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
साहित्य अकादमी की फंडिंग पर संकट
यह आयोजन साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित था। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की थी। भविष्य में फंड देने से पहले विचार किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, अकादमी ने यूजीसी को पत्र लिखकर वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में फंडिंग न देने का सुझाव भी दिया है।
साहित्यकारों की दो टूक
वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवारी ने कहा कि अतिथि की गरिमा बनाए रखना कुलपति की जिम्मेदारी थी, लेकिन जो हुआ वह अत्यंत निंदनीय है।
द्वारिका प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि इस घटना से पूरा बिलासपुर देशभर में बदनाम हुआ है।
शिक्षाविद राजकुमार अग्रवाल ने इसे अभद्रता की पराकाष्ठा बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति की भूमिका पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं साहित्यिक जगत में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
